सितंबर 2026 में कमजोर पड़ेगा मानसून, देशभर में बारिश की कमी के संकेत
नई दिल्ली, 28 अप्रैल:
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 का अंतिम चरण कमजोर रहने की आशंका जताई गई है। मौसम एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में कुल वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। अनुमान है कि इस दौरान बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 89% ही रह सकती है, जो स्पष्ट रूप से “बिलो नॉर्मल” श्रेणी में आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में बारिश कम होने की 70% संभावना है, जबकि सामान्य बारिश की संभावना 20% और सामान्य से अधिक बारिश की संभावना केवल 10% बताई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि मानसून का समापन चरण कमजोर रहेगा और देश के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधि घटेगी।
किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर:
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों—जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों—में सामान्य के आसपास बारिश हो सकती है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु और केरल में भी सामान्य वर्षा की संभावना बनी हुई है।
इसके विपरीत, मध्य, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत—जैसे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र—में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है। पश्चिमी तटीय क्षेत्रों, खासकर कोंकण और दक्षिण गुजरात में भी वर्षा गतिविधि कमजोर रहने के संकेत हैं।
कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव:
सितंबर में कम बारिश का असर फसलों की अंतिम अवस्था, मिट्टी की नमी और जलाशयों के भराव पर पड़ सकता है। विशेष रूप से मध्य और पश्चिम भारत में किसानों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, सितंबर 2026 मानसून के कमजोर समापन का संकेत दे रहा है, जिसमें देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की कमी और मानसून की वापसी (withdrawal) का स्पष्ट असर देखने को मिलेगा।




