हल्द्वानी के निकट शिवालिक छकाता रेंज के रोशिला–पसौली मार्ग पर रविवार को एक अनोखी पहल देखने को मिली, जहां सिख समाज ने गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा का संदेश दिया। आध्यात्म और प्रकृति संरक्षण के इस संगम ने लोगों का ध्यान तेजी से बढ़ते पर्यावरणीय संकट की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिमालयी तराई क्षेत्र में बढ़ती वन कटाई, तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण वन्यजीव रिहायशी क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। पिछले 15 दिनों में गुलदार हमलों में तीन लोगों की मौत इस खतरे की गंभीरता को दर्शाती है।
सरदार जगजीत सिंह आनंद के नेतृत्व में आयोजित इस कीर्तन में अमनदीप सिंह टिंकू, महेंद्र सिंह सेठी और जसपाल सिंह सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। यह आयोजन हाल ही में वन्यजीव हमलों में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि के रूप में भी समर्पित रहा।
आयोजकों ने वन अग्नि रोकथाम, वृक्षारोपण और प्लास्टिक उपयोग में कमी लाने की अपील की। गुरबाणी के संदेश “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरती महत” का उल्लेख करते हुए लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया गया।
यह पहल दिखाती है कि जन-जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संतुलन और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।




