गाजियाबाद–सीतापुर रेलखंड पर तीसरी-चौथी लाइन को कैबिनेट की मंजूरी, 14,926 करोड़ की मेगा परियोजना से बदलेगा कनेक्टिविटी का नक्शा
नई दिल्ली/लखनऊ, 18 अप्रैल 2026।
देश के महत्वपूर्ण दिल्ली–गुवाहाटी हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर के तहत गाजियाबाद से सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। करीब 403 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 14,926 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे 4 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई और सीतापुर जिलों से होकर गुजरेगी। इसके तहत रेल नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा।
🔹 बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण
परियोजना में
5 मेगा ब्रिज,
52 बड़े पुल,
306 छोटे पुल,
238 अंडरपास (RUBs),
9 ओवरब्रिज (ROBs) और
5 रोड ओवर रेल (RORs) का निर्माण किया जाएगा।
कुल 859 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जाएगा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही क्षमता में भारी वृद्धि होगी।
🔹 6 नए आधुनिक स्टेशन बनेंगे
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर 6 नए स्टेशन बनाए जाएंगे:
न्यू हापुड़, न्यू मुरादाबाद, न्यू रामपुर, न्यू बरेली, न्यू शाहजहांपुर और न्यू सीतापुर।
🔹 उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह परियोजना क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को सीधा लाभ पहुंचाएगी, जिनमें—
गाजियाबाद का मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा उद्योग,
मुरादाबाद का ब्रासवेयर और हस्तशिल्प,
शाहजहांपुर का फर्नीचर, टेक्सटाइल और कालीन उद्योग शामिल हैं।
साथ ही, दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर मंदिर और अमरोहा की दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
🔹 यात्री और मालगाड़ियों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई लाइनों के बनने से
लंबी दूरी की ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी,
मालगाड़ियों का संचालन सुचारू होगा,
हर साल 36 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
🔹 पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को दोहरा लाभ
परियोजना से हर वर्ष करीब 129 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
इसके अलावा, 2,877 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लॉजिस्टिक लागत में बचत होगी।
🔹 रोजगार के नए अवसर
निर्माण कार्य के दौरान 274 लाख मानव-दिवस के बराबर रोजगार सृजित होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के उत्तर और पूर्वी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को नई गति देगी, बल्कि औद्योगिक विकास, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एक मील का पत्थर साबित होगी।




