देहरादून।
पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने शुक्रवार को अपने आवास पर एक अनोखी बैठक का आयोजन कर एक बार फिर स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश दिया। ‘अर्जित अवकाश’ को लेकर चर्चा में रहे रावत ने इस कार्यक्रम के जरिए सक्रिय राजनीति में अपनी वापसी भी दर्ज कराई।
कार्यक्रम में मेहमानों को तरबूज, खीरा और खरबूजा परोसा गया, वहीं उत्तरकाशी का लाल चावल, भट्ट की चुड़कानी, मंडवे की रोटी और विभिन्न चटनियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
इस अवसर पर रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल शुरू की थी, जिसे वह आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि हरिद्वार क्षेत्र में नदी किनारे उगाए जाने वाले फलों को बढ़ावा देने की मांग किसानों ने की थी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के व्यंजन और उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे। रावत ने यह भी खुशी जताई कि झंगोरे की खीर अब राष्ट्रपति भवन के मेन्यू में भी जगह बना चुकी है।
कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।




