ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने की मांग, भाजपा नेता लक्ष्मण भंडारी ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी उत्तराखण्ड के प्रदेश सह संयोजक (चिकित्सा प्रकोष्ठ) लक्ष्मण सिंह भंडारी ने मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपते हुए राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को दिए जाने वाले आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने की मांग की है। भंडारी ने मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में राज्य के ओबीसी समाज की दशा-दुर्दशा और उनकी सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक स्थिति का संज्ञान लेते हुए आग्रह किया कि उन्हें सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में ठोस पहल की जाए।
ज्ञापन में उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में निवासरत ओबीसी समाज आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है और उन्हें राजकीय सेवाओं के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य वर्गों की तुलना में ओबीसी वर्ग की सरकारी पदों और योजनाओं में भागीदारी अत्यंत सीमित है, जिससे यह समाज मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाया है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं को आज भी छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षिक सुविधाएं अन्य वर्गों के समान नहीं मिल रही हैं।
भंडारी ने कहा कि हमारे संविधान में समानता के अधिकार का प्रावधान है, जिसके तहत ओबीसी समाज को भी राजकीय सेवाओं के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित 14 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी वर्ग की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है और इससे उनकी सामाजिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो पाया है।
लक्ष्मण सिंह भंडारी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा की गई सिफारिशों को शीघ्र लागू किया जाए। उन्होंने सात प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया, जिनमें आरक्षण को 27 प्रतिशत तक बढ़ाने, क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ाने, ओबीसी कल्याण निदेशालय के गठन, ओबीसी आयोग के पुनर्गठन, आईएएस-पीसीएस परीक्षा की निशुल्क कोचिंग व्यवस्था, कक्षा 1 से 8 तक छात्रवृत्ति, और व्यावसायिक शिक्षा के लिए कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा जैसे विषय शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है तो इससे न केवल ओबीसी समाज का सशक्तिकरण होगा बल्कि राज्य के सामाजिक ताने-बाने में भी समरसता और समता की भावना को बल मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर ओबीसी समाज के साथ न्याय किया जाए।
ज्ञापन में राजेश बिजल्वाण (प्रदेश सह संयोजक, विधि प्रकोष्ठ, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा उत्तराखण्ड) का भी समर्थन अंकित किया गया है।
लक्ष्मण सिंह भंडारी ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद से ही ओबीसी समाज लगातार उपेक्षित रहा है। आज तक किसी भी सरकार ने इस वर्ग की सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए ठोस और दूरदर्शी नीति नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ भी राज्य स्तर पर ठीक प्रकार से नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि यहां एक स्वतंत्र ओबीसी कल्याण निदेशालय तक का गठन नहीं किया गया है।
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को चाहिए कि अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखण्ड में भी ओबीसी समाज के लिए नीतिगत सुधार किए जाएं। भंडारी ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करती है, तो इससे न केवल सामाजिक न्याय की स्थापना होगी, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि ओबीसी आयोग का पुनर्गठन कर उसमें समाज के सक्रिय, जागरूक एवं जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए ताकि आयोग की सिफारिशें केवल कागजों तक सीमित न रह जाएं, बल्कि धरातल पर भी प्रभावी ढंग से लागू हो सकें।
लक्ष्मण सिंह भंडारी ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे कोचिंग और अन्य संसाधनों का लाभ नहीं ले पाते। ऐसे में उन्हें अनुसूचित जाति और जनजाति की भांति निशुल्क कोचिंग, छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री से यह अपील की कि राज्य सरकार ओबीसी समाज के प्रति न्यायपूर्ण रवैया अपनाते हुए उनकी सिफारिशों पर शीघ्र निर्णय ले और उन्हें लागू करे, ताकि यह वर्ग भी समान अवसरों के साथ राज्य निर्माण और विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके।
भंडारी ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मांग पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेंगे और अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों को लागू कर प्रदेश में सामाजिक न्याय की नई मिसाल पेश करेंगे।

