उत्तर प्रदेश

(दुखद) नियति बन गया है तराई केंद्रीय वन विभाग के जंगल से बाहर हाथियों का निकलना. आखिर कब तक ट्रेन से टकराकर और करंट से मरते रहेंगे गजराज।।

हल्द्वानी-: तराई केंद्रीय वन प्रभाग से सटे ग्राम पंचायत पदमपुर देवलिया के सूपी भगवानपुर गांव में जंगल से निकलकर गन्ने के खेत में आते समय करंट लगने से एक नर हाथी की दर्दनाक मौत हो गई घटना की सूचना खेत स्वामी मोहन जग्गी पुत्र स्व. टीकम जग्गी ने स्थानीय ग्राम प्रधान को दी जिस पर मौके पर पहुंचे ग्राम प्रधान रमेश चंद्र जोशी ने इसकी सूचना वन विभाग को दी इस घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने नर हाथी के शव को कब्जे में लेकर के उसे नजदीक जंगल में ले जाकर उसके शव की जांच पड़ताल की तथा बाद में वन विभाग और जिम कार्बेट नेशनल पार्क के डॉक्टर आयुष उनियाल एवं हिमांशु पांगती ने मृत हाथी के शव का पोस्टमार्टम किया और शव को दफना दिया ।
प्रभागीय वनाधिकारी केंद्रीय तराई वैभव कुमार ने बताया कि हाथी जंगल से सटे एक गांव में गन्ना खाने को गया था जहां 11 केवी की विद्युत लाइन के तार छू जाने से उस की दर्दनाक मौत हो गई श्री कुमार ने कहा कि वन विभाग झूल रहे तारों की स्टडी कर रहा है यदि तार मानक के अनुरूप नहीं पाए गए तो वन विभाग विद्युत विभाग के खिलाफ कार्यवाही करेगा. श्री कुमार ने बताया कि इससे पूर्व भी स्थानीय ग्रामीणों ने खेतों में झूल रहे विद्युत तार को लेकर विद्युत विभाग से शिकायत करी थी लेकिन उसके बावजूद भी यह घटना हो गई। उधर सब विद्युत वितरण खंड लालकुआं के अधिशासी अभियंता संजय प्रसाद ने बताया कि यह घटना सुबह तड़के करीब 4:45 बजे की है जब हाथी गांव में आया उन्होंने बताया कि विद्युत के तार प्रॉपर थे लेकिन सूड़ उठाते समय संभवत यह घटना घटी और करंट लगते ही विद्युत ट्रिप हो गई तथा विद्युत पोल भी झुक गया और हाथी की दुखद मौत हो गई फौरी तौर पर विद्युत विभाग तारों को दुरुस्त करने में जुटा है।

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हल्द्वानी-: तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल में वितरण करने वालों गजराजो की नियति दर्दनाक ही कही जाएगी यहां एक महीने में दो हाथियों की दर्दनाक मौत हो गई 18 दिसंबर को हल्दी रेलवे स्टेशन के समीप ट्रेन दुर्घटना में जहां एक हाथी के बच्चे की ट्रेन से टकराकर मौत हो गई थी वही आज करंट लगने से एक नर हाथी ने दम तोड़ दिया है हाथियों के विचरण के लिए अवरोध बन गया अतिक्रमण हाथी कॉरिडोर के विकास में बाधक बना हुआ है जब हाथी अपने कॉरिडोर से गुजर कर जाना चाहते हैं तो बेतरतीब विकास उनके रास्ते में बाधक बनता है वही ग्रामीण क्षेत्रों में अनियोजित विकास इन घटनाओं का कारण बनते हैं वही रास्ता ना मिलने के बाद भटक कर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर हाथी अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं कुल मिलाकर जब तक हाथी कोरिडोर के लिए सरकार गंभीर नहीं होगी तब तक इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को मिलेंगी ।।

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