उत्तराखण्ड

सेंचुरी पल्प एंड पेपर (लालकुआं) प्रदूषण नहीं धरातल पर काम, सेंचुरी ने रखी 200 एकड़ में हरित क्रांति की नींव: हुआ अहम समझौत ।।

200 एकड़ में हरित क्रांति की नींव: सेंचुरी पल्प और पंतनगर यूनिवर्सिटी का ऐतिहासिक समझौता
लालकुआँ, 3 अप्रैल 2026। पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास को नई दिशा देते हुए सेंचुरी पल्प एवं पेपर और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के बीच 200 एकड़ भूमि पर वृक्षारोपण हेतु एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक समझौता हुआ है। 31 मार्च 2026 को हुए इस करार को क्षेत्र में “हरित भविष्य की मजबूत नींव” के रूप में देखा जा रहा है।
यह समझौता सेंचुरी मिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय कुमार गुप्ता और विश्वविद्यालय के उप नियंत्रक फार्म सत्य प्रकाश कुरील के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. टी.पी. सिंह, महाप्रबंधक डॉ. आशुतोष सिंह तथा सेंचुरी मिल के मुख्य वित्त अधिकारी महेंद्र कुमार हरित, उपाध्यक्ष नरेश चन्द्रा, अमित गंगवाल और रवि प्रताप सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
🌱 हरियाली, रोजगार और उद्योग—तीनों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी न केवल कच्चे माल की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि हरित आवरण बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने इसे “पर्यावरण और विकास के संतुलन की दिशा में एक मजबूत पहल” बताया।
🌳 करोड़ों पौधों का लक्ष्य, तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन
उपाध्यक्ष नरेश चन्द्रा ने बताया कि सेंचुरी मिल ने वर्ष 2025–26 में 2.22 करोड़ पौधों का वृक्षारोपण कर एक बड़ा रिकॉर्ड स्थापित किया है। वहीं, वर्ष 2026–27 के लिए 2.50 करोड़ पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही यूकेलिप्टिस के क्लोन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक मिस्ट चैम्बर भी स्थापित किया गया है, जिससे पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
🔴 EXCLUSIVE: “मुद्दों से आगे, ज़मीन पर काम”
आज जहां अक्सर ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर केवल बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं, वहीं सेंचुरी पल्प एंड पेपर का यह कदम एक अलग उदाहरण पेश करता है। कंपनी केवल पर्यावरणीय चिंताओं को उठाने तक सीमित नहीं, बल्कि धरातल पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर वास्तविक बदलाव की दिशा में कार्य कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें ही प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में दीर्घकालिक प्रभाव डालती हैं।
🌍 क्षेत्र के लिए क्यों खास है यह समझौता
यह करार केवल एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक जरूरतों और कृषि सहयोग के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रभावी मॉडल है। इससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और सतत विकास को गति मिलेगी।
👉 कुल मिलाकर, यह पहल उत्तराखंड में “ग्रीन ग्रोथ” की दिशा में एक बड़ा और प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।

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