हल्द्वानी-: बरसात का मौसम अब विदाई की और है तथा अक्टूबर से गौला नदी में खनखनाने वाले बेल्चे और फावड़े की आवाज सुनाई देने में समय लगता दिख रहा है खनन सत्र अक्टूबर में प्रारंभ हो जाता है लेकिन फौरी तौर पर अभी भी बरसात अपना रंग दिखा रही है इन सबके बीच सबसे बड़ा मुद्दा खनन कारोबार से जुड़े हुए व्यवसायियों का है जो समान खनन रॉयल्टी और समतलीकरण को लेकर संघर्ष करते दिख रहे हैं कोरोना काल के बाद किन स्थितियों में लोगों ने गुजर-बसर कर अपने जीवन को बचाया यह सब जानते हैं लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में सबसे बड़ा खनन कारोबार अभी भी नहीं उबर पाया है 7 हजार से अधिक वाहन स्वामियों तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों से जुड़ा यह कारोबार अपनी अंतिम सांसे गिनता हुआ दिखाई दे रहा है इसको पुनर्जीवित करने के लिए खनन कारोबारी पिछले कई वर्षों से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन अभी तक इस पर सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है ।
उधर गौला खनन संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार द्वारा समतलीकरण के नाम से जो पट्टे दिए गए हैं। उनकी रॉयल्टी ₹8 प्रति कुंटल है जबकि गौला नदी की रॉयल्टी ₹31 प्रति कुंटल है। स्टोन क्रेशरों से रेता बजरी का उठान न होने के कारण खनन सामग्री डंप पड़ी है जिससे क्रेशरों द्वारा आने वाले सीजन में खनन सामग्री नहीं लेने का निर्णय लिया गया । क्रेशरों स्वामियों का कहना है कि खनन सामग्री का उठान ना होने कारण गौला नदी से खनन सामग्री नहीं ली जाएगी। क्रेशरों का कहना है कि गौला नदी का खनन सामग्री 4 गुना अधिक रॉयल्टी है जिससे क्रेशरों से खनन सामग्री का उठान नहीं हो पा रहा है ।गौला संघर्ष समिति ने केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट को ज्ञापन देकर यह भी मांग की क्षेत्र के रोजगार का एकमात्र साधन जिससे क्षेत्र के लोगों की रोजी-रोटी चलती है। क्षेत्र के लोग गौला नदी खुलने का इंतजार करते हैं अब जब क्रेशर ही गौला नदी का खनन सामग्री को नहीं खरीदेंगे तो डंपर एसोसिएशन ने जब तक रॉयल्टी कम नहीं होगी तब तक गौला नदी में डंपरों द्वारा खनन कार्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की जल्दी से जल्दी इस समस्या का निदान करा जाए। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से डंपर एसोसिएशन के अध्यक्ष इंदर सिंह बिष्ट देवेंद्र सिंह बिष्ट हरीश चौबे हरीश भट्ट मनोज मठपाल जीवन बोरा कौस्तुभानंद भट्ट कंचन जोशी बलवंत मेहरा समेत दर्जनों लोग थे।




