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उत्तराखण्ड में आगामी दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा, हालांकि कुछ पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 14 और 15 अप्रैल को राज्य के सभी जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इन दिनों कहीं भी वर्षा की कोई संभावना नहीं है, जिससे लोगों को साफ मौसम देखने को मिलेगा।
वहीं 16 और 17 अप्रैल को मौसम में आंशिक बदलाव देखने को मिल सकता है। इन तिथियों पर उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश या गर्जन के साथ वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही 3800 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी भी हो सकती है। राज्य के अन्य जिलों में मौसम शुष्क बना रहेगा।
18 अप्रैल को भी पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का यही रुख जारी रहने की संभावना है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। जबकि राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में फिलहाल गर्मी धीरे-धीरे बढ़ेगी, जबकि पहाड़ी इलाकों में हल्की बारिश से तापमान में गिरावट बनी रह सकती है।
उत्तराखण्ड में तापमान सामान्य, अगले 4–5 दिनों में बढ़ेगी गर्मी
उत्तराखण्ड में मौसम फिलहाल संतुलित बना हुआ है। मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य रहा, जबकि पहाड़ी इलाकों में यह सामान्य से कम दर्ज किया गया।
वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो मैदानी क्षेत्रों में यह सामान्य से नीचे से लेकर सामान्य के बीच रहा, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रिकॉर्ड किया गया।
पिछले 24 घंटों में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस पंतनगर (ऊधम सिंह नगर) में दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री सेल्सियस मुक्तेश्वर (नैनीताल) में रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4 से 5 दिनों के दौरान उत्तराखण्ड में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल राज्य में कहीं भी हीट वेव (लू) की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने के साथ ही गर्मी का असर मैदानी क्षेत्रों में अधिक महसूस किया जा सकता है।




