उत्तराखंड में ईमानदारी की मिसाल: संज़ीव चतुर्वेदी ने 3 लाख से अधिक भत्ते की राशि दान कर पेश की प्रेरक मिसाल
Haldwani-: जहां एक ओर अक्सर सरकारी तंत्र पर सवाल उठते हैं, वहीं उत्तराखंड से एक ऐसी खबर सामने आई है जो ईमानदारी, सेवा और संवेदनशीलता की नई परिभाषा गढ़ती है। राज्य के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी संज़ीव चतुर्वेदी ने अपने आधिकारिक दौरों के दौरान प्राप्त तीन लाख रुपये से अधिक की पूरी भत्ता राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने का सराहनीय निर्णय लिया है।
उन्होंने 4 अप्रैल 2026 को प्रमुख वन संरक्षक को पत्र लिखकर इसकी औपचारिक जानकारी दी। अपने पत्र में उन्होंने साफ कहा कि वर्षों से प्राप्त भत्तों का निजी उपयोग करने के बजाय उन्हें जनहित में लगाना अधिक सार्थक है।
जानकारी के अनुसार, 17 दिसंबर 2016 से 30 अगस्त 2025 के बीच उन्होंने कुल 447 दिनों तक कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दीं। इस दौरान मिले दैनिक भत्ते और अन्य आर्थिक लाभ को उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता के लिए समर्पित कर दिया।
अपने कार्यकाल में उन्होंने उत्तराखंड के कई चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों—मिलम ग्लेशियर, हर की दून, नंदा देवी बायोस्फीयर, केदारनाथ, नीती घाटी, तपोवन और हेमकुंड साहिब—में कार्य किया। इन क्षेत्रों में उनके प्रयासों से न केवल जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिली, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका को भी सहारा मिला।
यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई हो। संज़ीव चतुर्वेदी इससे पहले भी कई मौकों पर अपनी आय और पुरस्कार राशि जनकल्याण में समर्पित कर चुके हैं।
वर्ष 2015 में मिले Ramon Magsaysay Award की पूरी राशि उन्होंने AIIMS Delhi में गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान की।
Pulwama attack के बाद शहीद परिवारों की सहायता के लिए भी उन्होंने आर्थिक सहयोग दिया। युवाओं के लिए प्रेरणा
देशभर में संज़ीव चतुर्वेदी को एक ईमानदार, निर्भीक और पारदर्शी अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनकी सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और समाजसेवा की भावना उन्हें युवाओं के लिए एक जीवंत प्रेरणास्त्रोत बनाती है।
ऐसे समय में जब सेवा से ज्यादा स्वार्थ की चर्चा होती है, यह कदम बताता है कि ईमानदारी आज भी जीवित है—और मिसाल बनकर सामने आ सकती है।




