उत्तराखण्ड

(सूख रहा जल स्रोत) समाज सेवी चिंतित. पत्राचार जारी [झील नगरी]

uttarakhand city news

भीमताल का सदियों पुराना जल स्रोत 4 साल से सूखा, समाजसेवी बृजवासी ने प्रशासन से की जांच व पुनर्जीवन की मांग
भीमताल। झीलों के शहर भीमताल में सदियों से बहने वाला एक महत्वपूर्ण जल स्रोत पिछले करीब चार वर्षों से सूखा पड़ा है। लगभग 15 से 20 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला यह स्रोत कभी भीमताल झील को रीचार्ज करने का मुख्य माध्यम माना जाता था। इसके सूखने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है और आसपास के क्षेत्रों में पानी की समस्या भी गंभीर होने लगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में पहली बार इस जल स्रोत को सूखा देखा है। हैरानी की बात यह है कि जल संस्थान, सिंचाई विभाग, वन विभाग, विकास प्राधिकरण, नगर पंचायत और जिला प्रशासन जैसे कई विभागों को जानकारी होने के बावजूद अब तक स्रोत के सूखने के कारणों की स्पष्ट जांच नहीं हो सकी है।
सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी ने इस मुद्दे को कई बार प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने निम्न स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार इस जल स्रोत की जांच और पुनर्जीवन की मांग की है। वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री के घोड़ाखाल मंदिर आगमन के दौरान उन्होंने यह मुद्दा सीधे उठाया था, जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने 11 मई 2022 को पत्रांक संख्या 4511 के तहत प्रशासन को जांच के निर्देश भी दिए थे, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
बृजवासी ने बताया कि कुमाऊँ आयुक्त, जिलाधिकारी, एसडीएम और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा भी इस संबंध में निर्देश दिए गए, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब गर्मियों का मौसम करीब आने के कारण नगरवासी फिर से पानी की समस्या को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह प्राकृतिक जल धाराएं सूखती रहीं और प्रशासन समय रहते जांच व संरक्षण के कदम नहीं उठाएगा, तो जल संरक्षण पर किए जाने वाले दावे केवल कागजी साबित होंगे।
इसी संबंध में बृजवासी ने एक बार फिर सहायक परियोजना निदेशक डीआरडीए चन्द्रा फरत्याल को ज्ञापन देकर जल स्रोत की तत्काल जांच और उसे पुनर्जीवित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस स्रोत को सारा प्रोजेक्ट के तहत पुनर्जीवित करने की योजना बनाई जा रही है, जिसके लिए बीडीओ भीमताल को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

Ad
To Top