उत्तर प्रदेश

(जल संरक्षण)यहां बायोटेक की लैब में नेपाल के बच्चों ने सीखी पेयजल की गुणवत्ता की जांच, हुए रोमांचित ।।

जल संरक्षण के साथ पेयजल की गुणवत्ता का भी रखें ख्यालः डॉ. मणिन्द्र मोहन
बॉयोटेक में बच्चों ने सीखा पेयजल की गुणवत्ता जांचने की विधि, जल संरक्षण के साथ पेयजल की गुणवत्ता को बताया बेहद जरूरी

पंतन। उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बॉयोटेक कॉउन्सिल) हल्दी में भ्रमण पर आये छात्र-छात्राओं ने बॉयोटेक की बारीकियों से अवगत होते हुए पेयजल की गुणवत्ता को जांचने की विधि को विस्तार में जाना। निदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल के मार्गदर्शन में सार्क ओपन स्कूल, हैतोडा, नेपाल के सोलह तथा दिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर से आये बारह बच्चों को फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता को जांचने की विधि बताई गयी। कार्यक्रम समन्वयक एवं वैज्ञानिक डॉ. मणिन्द्र मोहन शर्मा ने शुद्ध पेयजल को अच्छे स्वास्थ्य का कुंजी बताते हुए जल संरक्षण के साथ-साथ पेयजल की गुणवत्ता को जरूरी है। बताया कि संक्रमित पेयजल के सेवन से हमेशा डायरिया, टाइफाइड, पेचिश (आंव), हैजा, हेपेटाइटिस एवं अमीबियासिस जैसी जलजनित घातक बीमारियों के होने की संभावना रहती है। छात्र-छात्राओं को ऊत्तक संवर्धन, हाइड्रोपोनिक व आणविक जीवविज्ञान के साथ पीसीआर मशीन व माइक्रोस्कोपी की जानकारी दी गयी। वैज्ञानिक डॉ. कंचन कार्की ने डीएनए पृथक्करण तथा डॉ. सुमित पुरोहित ने पादप उत्तक संवर्धन विधि से पौधों के उत्पादन की जानकारी दी। प्रशिक्षण में श्रुति जोशी, अनुज जॉन, स्वाति और प्रियंका रावत का विशेष योगदान रहा। यहां वैज्ञानिक डॉ. कंचन कार्की, डॉ. सुमित पुरोहित सहित कौशल कुमार, प्रिया कुलश्रेष्ठ, शिक्षक लक्ष्मण बसनेत, निकिता खराल, प्रतिभा बुढाथोकी, रेखा बिष्ट, अभय भदौरिया, मनोज यादव, पवन त्रिपाठी, सचिन शर्मा उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें 👉  बड़ी खबर(देहरादून) नाबालिग युवती को लेकर हुआ फरार, आरोपी गिरफ्तार ।।

Ad Ad
To Top