चैत्र नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना, शक्ति-पूजा और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत) की शुरुआत के लिए मनाई जाती है। यह वसंत ऋतु में पड़ती है, जो आंतरिक शुद्धि, आध्यात्मिक ऊर्जा, और बुराई पर अच्छाई की विजय (महिषासुर वध) का प्रतीक है, साथ ही यह राम नवमी के साथ समाप्त होती है।
चैत्र नवरात्रि वर्ष 2026
नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री) की पूजा कर आध्यात्मिक शक्ति और ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
हिंदू नववर्ष की शुरुआतः चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (पहला दिन) से भारतीय नव वर्ष की शुरुआत मानी जाती है जो इस वर्ष विक्रमी समवत 2083 आरंभ होगा।
पौराणिक कथा (महिषासुर वध): माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक युद्ध कर महिषासुर नामक राक्षस का संहार किया था, जिससे देवताओं की रक्षा हुई।
ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्यः यह समय वसंत ऋतु का होता है, जब मौसम बदलता है। इस दौरान व्रत और सात्विक भोजन करने से शरीर को डिटॉक्स (शुद्ध) करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलती है।
भगवान राम का जन्मः इस नवरात्रि का नौवां दिन (राम नवमी) भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि मनाने के प्रमुख कारण और महत्वः
शक्ति पूजा और दुर्गा पूजाः
आध्यात्मिक उन्नतिः यह आत्म-अनुशासन, साधना और उपवास के माध्यम से नकारात्मकता को दूर करने का समय माना जाता है।
घट स्थापना कब करें।
घटस्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, चौत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 18 मार्च 2026 को रात 08:14 बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन 19 मार्च 2026 को रात 09:04 बजे होगा। चूंकि हिंदू धर्म में उदय तिथि का महत्व है, इसीलिए चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष का आरंभ 19 मार्च 2026 को ही माना जाएगा।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का सही मुहूर्त: 19 मार्च 2026 को घटस्थापना के लिए सबसे शुभ समय सुबह सूर्योदय के बाद का है:
शुभ मुहूर्तः सुबह 06:26 से सुबह 07:58 तक।
अभिजीत मुहूर्तः दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक।
चैत्र नवरात्र 2026 की तिथियांः
19 मार्चः मां शैलपुत्री पूजा और कलश स्थापना
20 मार्चः मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
पूजा 21 मार्चः मां चंद्रघंटा की
22 मार्चः मां कूष्मांडा का पूजन
23 मार्चः मां स्कंदमाता की उपासना
24 मार्च: मां कात्यायनी की वंदना
पूजा 25 मार्चः मां कालरात्रि की
26 मार्चः मां महागौरी (महाअष्टमी व्रत)
27 मार्च मां सिद्धिदात्री (राम नवमी का महापर्व)
कैसे करे अपने घर पर कलश स्थापना।
चौकी और आसनः मां की प्रतिमा स्थापित करने के लिए एक लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए साफ लाल कपडा ले।
कलश की सामग्रीः मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश, शुद्ध जल, गंगाजल, कलावा, आम या अशोक के पत्ते और एक जटा वाला नारियल।
कलश के लिए चुनरीः नारियल को लपेटने के लिए एक छोटी लाल चुनरी या लाल कपड़ा।
अक्षत और रोलीः पूजा के लिए बिना टूटे हुए चावल (अक्षत), रोली, सिंदूर और चंदन।
दीपक और धूपः देसी घी का दीपक, लंबी बाती, कपूर, ६ तूपबत्ती और माचिस ।
जौ बोने की सामग्रीः मिट्टी का एक चौड़ा पात्र, साफ मिट्टी और बोने के लिए साफ जौ।
श्रृंगार और भेंटः मां के लिए लाल चुनरी, सोलह श्रृंगार का सामान और ताजे लाल फूल या माला।
प्रसादः मिश्री, पंचमेवा या ऋतु फल और आरती के लिए एक छोटी घंटी।
इसके अलावा आप अपने
घर में अखंड ज्योत भी जला सकते हैं एवं प्रत्येक दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करे एवं अंत में आरती करें व प्रसाद माँ को प्रसाद अर्पित करें।
व्रत में क्या खाए
फलः केला, सेब, अनार, पपीता, अंगूर, संतरा, और अमरूद व्रत में खाए जा सकते हैं।
आटा-व्रत के चावल कुहू का आटा, सिंघाड़े का आटा, और समा के चावल का उपयोग करके पूड़ी, चीला, रोटी या खिचड़ी बनाएं। साबूदाना खिचड़ी, वड़ा, या खीर बनाकर खाएं।
सब्जी-शकरकंद, अरबी, कद्दू, लौकी, खीरा, टमाटर का उपयोग करें।
दूध, दही, पनीर, छाछ, घी का सेवन करें।
अन्यः मूंगफली, मखाने, बादाम, काजू, किशमिश ।
मसालेः सेंधा नमक काली मिर्च, जीरा, हरी इलायची, अदरक, धनिया खा सकते हैं। शाम को व्रत खोले ।




