उत्तराखण्ड

(तापमान बढ़ोत्तरी) गर्म कपड़ो की होंगी विदाई, जंगलों के लिए खतरा, इस दिन से बदलेगा मौसम।।

Uttarakhand city news dehradun उत्तराखंड में तापमान बढ़ने के साथ ही जंगलों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है ऐसे में मौसम विभाग ने एक नई अपडेट जारी कर सतर्कता की बात कही है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत कार्यरत मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 6 मार्च तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। इस दौरान तापमान में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी होने की संभावना है। हालांकि 7 मार्च को पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पहाड़ों में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे मैदानी इलाकों को भी आंशिक राहत मिल सकती है।

प्रदेश में बढ़ते तापमान के साथ ही वनाग्नि का खतरा गहराने लगा है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 4 से 5 दिनों में उत्तराखण्ड के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है। इससे जंगलों में सूखापन बढ़ेगा और आग लगने की आशंका भी तेज हो सकती है।
तापमान का हाल
पिछले 24 घंटों में प्रदेश के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में यह सामान्य से ऊपर रहा। न्यूनतम तापमान मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया।
प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 30.5°C रुड़की (जनपद हरिद्वार) में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.1°C मुक्तेश्वर (जनपद नैनीताल) में रिकॉर्ड किया गया।
वनाग्नि को लेकर चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार लगातार बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण जंगलों में नमी कम हो रही है। यदि तेज हवाएं चलीं तो आग तेजी से फैल सकती है। ऐसे में वन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में घास जलाने, कूड़ा जलाने या लापरवाही से फेंकी गई जलती सामग्री भी आग का कारण बन सकती है। लोगों से अपील की गई है कि जंगलों के आसपास किसी भी प्रकार की ज्वलनशील गतिविधि से बचें।
प्रशासन अलर्ट मोड में
वन विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है। फायर वॉच टावरों एवं फील्ड स्टाफ को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी घटना पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
प्रदेश में मार्च माह की शुरुआत के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी का यह ट्रेंड आगामी दिनों में वनाग्नि के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

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