उत्तराखण्ड

(गृह पूजा) होली के बहाने सियासी संकेत: ‘बाबूजी’ के मंच से उत्तराधिकारी की झलक, लालकुआं विधानसभा में नए समीकरण तेज ।

होली के बहाने सियासी संकेत: ‘बाबूजी’ के मंच से उत्तराधिकारी की झलक, लालकुआं में नए समीकरण तेज ।
लालकुआं। होली के रंगों के बीच इस बार लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में सियासत के रंग भी गहराते नजर आए। मोटाहल्दू क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे प्रदेश महामंत्री युवा मोर्चा दीपेंद्र सिंह कोश्यारी के नए भवन की गृह पूजा के अवसर पर आयोजित होली महोत्सव ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।


कार्यक्रम में पहली बार ‘भगत दा’ को मंच से ‘बाबूजी’ कहकर संबोधित किया गया। इस बदले संबोधन को राजनीतिक जानकार दीपेंद्र की नई पारी की शुरुआत के संकेत के रूप में देख रहे हैं। सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बाबूजी ने संगठन, युवा नेतृत्व और भविष्य की दिशा को लेकर जो संदेश दिए, उन्हें लालकुआं की राजनीति में अहम माना जा रहा है।

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चर्चाओं का केंद्र उनके भतीजे दीपेंद्र सिंह रहे। माना जा रहा है कि बाबूजी ने उन्हें सार्वजनिक रूप से आगे बढ़ाने का संकेत देते हुए भविष्य की राजनीति के “गुरु मंत्र” दिए। सूत्रों के अनुसार, लालकुआं विधानसभा सीट से दीपेंद्र सिंह को संभावित उम्मीदवार के रूप में तैयार करने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। मंच से दिए गए संदेशों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
महोत्सव में पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा सांसद अजय भट्ट,विधायक भीमताल राम सिंह कैड़ा, विधायक नैनीताल सरिता आर्य, दर्जा राज्य मंत्री अनिल कपूर डब्बू शंकर कोरंगा के अलावा , भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को संगठनात्मक मजबूती का संदेश भी दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबूजी ने एक साथ कई संकेत दिए—एक ओर संगठन में सक्रियता का आह्वान, तो दूसरी ओर क्षेत्र में नए नेतृत्व को स्थापित करने की दिशा। यही कारण है कि उनके विरोधी खेमे भी अब नफा-नुकसान का आकलन करते हुए अपनी भविष्य की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।
लालकुआं में होली का यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में शक्ति प्रदर्शन और उत्तराधिकार की सियासी पटकथा का प्रारंभिक अध्याय बन गया है। अब देखना यह होगा कि रंगों से सजी यह राजनीतिक बिसात चुनावी रण में किस रूप में सामने आती है।

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