हरिद्वार
हरिद्वार कहते हैं जिसको बचाने वाला भगवान हो उसका कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता ऐसा ही आज एक उदाहरण शरदीय नवरात्र में उस समय देखने को मिला जब एक कुमाता ने अपने पाप को छुपाने के लिए अपनी नवजात को एक कूड़े के ढेर में फेंक दिया यह तो भला हो उत्तराखंड पुलिस के चेतक 31 के पुलिसकर्मियों का जिन्होंने त्वरित सूचना के बाद दो नहर के बीच कूड़े के ढेर से नवजात को बरामद कर रो रही बच्ची को चुप कराते हुए उसे बिना देर कर अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने इस घटना को लेकर जहां कार्रवाई की बात कही है वही नवरात्र में जहां देवियों को पूजने के लिए कन्याओं की कमी हो रही है वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो घणित कार्य में लिप्त होकर इस तरह की घिनौनी हरकत करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

बताया जाता है कि हरिद्वार जो धर्म नगरी के नाम से भी जानी जाती है वहां लक्ष्मी रूपी नवजात कन्या को एक कुलक्ष्णा मां ने रोते बिलखते हुए कूड़े के ढेर में फेंक दिया कलियर थाना क्षेत्र अंतर्गत हुई इस घटना के दौरान चेतक 31 के पुलिसकर्मियों को सूचना मिली कि एक बच्ची कूड़े के ढेर पर बड़ी रो रही है जिस पर चेतक के कर्मचारी रविंद्र बालियान तुरंत मौके पर पहुंचे इस बीच एक अन्य साथी होमगार्ड अमरीश कुमार ने प्रभारी निरीक्षक राठी को इसी को लेकर फोन किया मौके की नजाकत समझते हुए धर्मेंद्र राठी द्वारा नाइट ऑफिसर एसआई शिवानी नेगी को मौके पर भेजा जिन्होंने नवजात को रात के अंधेरे में पहुंचकर अपनी ममता की छांव देकर उसे सुरक्षित किया रात्रि में पड़ रही ठंड के कारण बच्ची एकदम परेशान थी जिसे संयुक्त चिकित्सालय रुड़की ले जाकर उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

इस बीच प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र राठी ने रात में ही प्रयास कर सीडब्ल्यूसी सदस्य गोपाल अग्रवाल के समक्ष नवजात को पेश किया जहां से शिशु को अनाथालय ट्रस्ट ऑफ इंडिया श्री राम आश्रम श्यामपुर हरिद्वार का आदेश होने पर वहां मौजूद गार्डन सीमा को सौंप दिया गया।
अब बात उस कुल्क्षणा कि की जाए जो अपने शारीरिक सुख के चलते समाज में अनचाही नवजात को जन्म देकर फेंक गई पुलिस का कहना है कि डॉक्टर के अनुसार यह एक या दो दिन कि नवजात हो सकती है फिर भी पुलिस अब उसको कुल्क्षणा की तलाश में जुट गई है जिस ने यह जघन्य कार्य किया। कुल मिलाकर माता रानी के नौ रूपों मैं होने वाली इस पूजा में अब यह नवजात भी आने वाले समय में कन्या पूजन के दिन लोगों के घर पहुंच कर माता रानी के रूप में पूजी जाएगी।




