उत्तराखण्ड

(लालकुआं विधानसभा क्षेत्र) डॉ मोहन सिंह बिष्ट ने ठोकी ताल,बिगड़ेंगे समीकरण,क्या कहा डॉक्टर मोहन सिंह बिष्ट ने, जाने एक क्लिक में

(लालकुआं विधानसभा क्षेत्र) विधानसभा चुनाव की जैसे-जैसे गतिविधियां तेज होती जा रही है वैसे वैसे राजनैतिक क्षेत्र में प्रभावी रूप से दखल देने वाले लोगों का जनता के बीच आना-जाना और बढ़ गया है बात की जाए PHD किए हुए डॉ मोहन सिंह बिष्ट की तो राजनैतिक परिवार से ना होने के बावजूद भी उन्होंने कम समय में बड़ा मुकाम हासिल कर क्षेत्र में अपना दबदबा कायम किया है,हमेशा से सभी के सुख दुख में खड़े होने वाले डॉक्टर मोहन सिंह बिष्ट का जन्म पुराना बिंदुखेड़ा लालकुआं मे हुआ, वर्तमान में वे अब हल्दुचौड़ जग्गी में निवास कर रहे हैं ।
छात्र राजनीति सें उभरकर आए श्री बिष्ट लगातार दो दशक से जनता के बीच जाकर जनसेवा के रूप में एक बार फिर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के लिए लोगों के बीच पहुंच कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
श्री बिष्ट कहते हैं कि 1996 में डीएसबी परिसर नैनीताल से छात्र राजनैतिक जीवन की शुरुआत की बतौर अध्यक्ष बनकर उन्होंने बड़ा काम किया इसके अलावा संघ की राजनीति से निकलकर उन्होंने अपने गृह क्षेत्र में भी राजनीति में अच्छी पकड़ बनाए रखी इसके बाद श्री बिष्ट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन 2009 में बतौर अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में बड़ा काम किया है 20 वर्षों से ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियों में अध्यक्ष व प्रतिनिधि के पद पर रहने के साथ-साथ छात्र जीवन में सत्र नियमितीकरण आंदोलन तथा अन्य छात्र हितों हेतु अनशन कर हर मांगों को प्रमुखता से उठाया, डॉक्टर मोहन सिंह बिष्ट कहते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में दुग्ध उत्पादकों को दूध का उचित मूल्य दिलाए जाने के लिए किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन 2006 से 2007 का नेतृत्व किया था जिसका नतीजा है कि सहकारिता के क्षेत्र में पशुपालकों को फायदा हो रहा है सामाजिक सरोकार तथा जनहित से जुड़े मामलों में सदैव संघर्षरत रहते हुए उन्होंने लालकुआ क्षेत्र के अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया तथा वर्ष 1991-92 में राम जन्मभूमि आंदोलन के कारण 10 दिनों का कारावास बागेश्वर में भी काट कर राम जन्मभूमि भूमि यज्ञ में अपना योगदान दिया ।
1990 में संघ प्राथमिक शिक्षा वर्ग मोदीनगर मेरठ से ग्रहण करने के बाद वह सक्रिय रूप से संघ के अपने नियमित कार्यक्रमों में भाग लेते रहे
साथ ही संघ के स्वयंसेवक के तौर पर हल्दुचौड़ में संघ की शाखा प्रारंभ कराने में उनका प्रत्यक्ष योगदान रहा। वही 2015 ने बेरीपड़ाव में संघ की शाखा प्रारंभ कराने में सहयोगी रहे तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों में रहकर उन्होंने क्षेत्र की जनता के हितों के लिए व्यापक कार्य किया है इसके अलावा श्री विष्ट ने लालकुआं तहसील में तीन दिवसीय आमरण अनशन भी 2015 और 16 में किया जिससे उन समस्याओं का समाधान हुआ। श्री बिष्ट कहते है कि लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के विकास का उन्होंने रोडमैप तैयार किया हुआ है बिंदुखत्ता में विकास बिंदुखत्ता रोड मैप की तरह किया जाएगा जबकि गौलापार में वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकास होगा, साथ ही लालकुआं का जो विकास छूटा हुआ है उसको लालकुआं के रोड मैप के अनुसार किया जाएगा उन्होंने कहा कि समस्या कोई बड़ी नहीं होती लेकिन समस्या को हल करने का जज्बा होना चाहिए।
उनका कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव के समय उनको पार्टी का टिकट नही मिला जिससे वह चुनाव नहीं लड़ सके लेकिन इस बार वह चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार हैं तथा निर्दलीय चुनाव लड़ कर वह विधानसभा में पहुंचेंगे।

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