पहाड़ों में लाखों पेड़ उगाने वाले और कई हेक्टेयर भूमि पर जंगल उगाने का श्रेय देने वाले 'ट्री मैन' (वृक्ष मानव) विश्वेश्वर दत्त सकलानी को आज उनकी 101वीं जयंती पर वृक्षारोपण और संबंधित गतिविधियों के साथ याद किया जाएगा। सकलानी का जन्म 2 जून 1922 को टिहरी जिले के पुजार गांव में हुआ था। उन्होंने आठ साल की उम्र में पेड़ लगाना शुरू कर दिया था। जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, उनका पेड़ लगाने का काम भी आगे बढ़ता गया। सकलानी और उनके बड़े भाई नागेंद्र सकलानी ने भी राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था। कई मौकों पर उन्हें जेल भी हुई थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नागेंद्र सकलानी शहीद हो गए थे। 1956 में उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया। इन घटनाओं ने पेड़ों के प्रति उनका लगाव और बढ़ा दिया जो उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया। कंधे पर झोली और हाथ में कुदाल लिए बलूत, देवदार और चौड़ी पत्ती वाली प्रजातियों के बीज बोने में मग्न हो गए। 2019 में 96 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके बेटे संतोष सकलानी का कहना है कि सकलाना पट्टी इलाके में करीब 1200 हेक्टेयर में 50 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए थे। इन पेड़ों में ओक, काफल और देवदार शामिल हैं। उनकी 101वीं जयंती और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए आज गांव में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा न्यू टिहरी




