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उत्तर प्रदेश

ब्रेकिंग-:पिथौरागढ़ और चमोली बनेगा आर्किड प्लांट का हब,वन अनुसंधान वृत्त बनेगा ग्रामीणों की आय का साधन,अब परजीवी प्लांट भी देगा रोजगार ।।

हल्द्वानी

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जैव विविधता से भरे उत्तराखंड में वन अनुसंधान वृत्त द्वारा उत्तराखण्ड के चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपद में आर्किड के संरक्षण के लिए हाथ बढ़ाएं हैं जिसके तहत स्थानीय ग्रामीणों को दो दिवसीय आर्किड से सबंधित प्रशिक्षण बंगाल के कलिमपोंग शहर में आयोजित किया गया। कलिमपोंग में स्थानीय जनमानस द्वारा आर्किड की वृहद पैदावार कर अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर आर्किड का निर्यात किया जाता है अब वन अनुसंधान दो जनपदों के ग्रामीणों के आर्थिक विकास का भागीदार बनेगा।


उत्तराखंड के इन दो जनपदों में सबसे अधिक आर्किड प्रजाति पाई जाती है जहां पर पिथौरागढ़ में गौरी घाटी में विभिन्न प्रकार की आर्किड पर वन विभाग काम कर रहा है पांच हेक्टेयर क्षेत्र में वन अनुसंधान आर्किड के संरक्षण पर काम कर रहा है तुन और मैंउआ वृक्ष पर उगने वाले यह परजीवी प्लांट फूलों के साथ-साथ मेडिसन के भी काम आता है जबकि इसकी कई प्रजाति जमीन पर भी पाई जाती हैं।

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वन वनवर्धनिक उत्तराखंड हल्द्वानी कुंदन कुमार ने बताया कि चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपद के ग्रामीणों को आर्किड प्रशिक्षण के लिये इस उद्देश्य से चुना गया था क्योंकि उक्त जनपदों में बहुतायत मात्रा में आर्किड की विभिन्न प्रजातियॉ प्राकृतिक रूप से पायी जाती है। अनुसंधान वृत का उद्देश्य उत्तराखंड के इन क्षेत्रों के ग्रामीण भी कलिंमपोंग की आर्किड पैदावार की पद्धति को उत्तराखण्ड में अपना कर इन क्षेत्रों को भी आर्किड उत्पादन के हब के रूप में विकसित करना है जिससे उत्तराखंड के स्थानीय लोगो के लिए रोजगार के अवसर पैदा किया जा सके। अनुसंधान वृत द्वारा चमोली एवं पिथोरागढ़ जनपद में आर्किड प्रजाति के पौधों की नर्सरी भी विकसित की गई है एवं स्थानीय लोगो को आर्किड प्रजाति से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने हेतु सूचना केंद्र भी स्थापित किया गए हैं।

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प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को नर्सरी इन्टरनेशनल कलिंमपोंग में आर्किड संवर्धन की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया तथा उसके पश्चात् ग्रामीणों को दार्जिलिंग वन प्रभाग के तकदा आर्किड सेन्टर व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय आर्किड अनुसंधान केन्द्र दार्जिलिंग का भ्रमण कराया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान गोपेश्वर एवं मुनस्यारी के ग्रामीणों के साथ वन अनुसंधान वृत्त के जे0 आर0 एफ0 मनोज सिंह, दीपक सिंह एवं वन आरक्षी कनीष कुमार भी मौजूद रहे।

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