हल्द्वानी
उत्तराखंड में टमाटर उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में इस बार टमाटर की खेती किसानों के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हुई है। फसल खराब होने
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के कारण करीब 80 प्रतिशत टमाटर काश्तकारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र में उत्पादन घटने का सीधा असर बाजार पर पड़ा है और बरसात के बाद शीत ऋतु में आने वाला टमाटर इस बार महंगाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है।

हल्द्वानी मंडी से बाहर निकलते ही टमाटर की कीमतें दुकानों में 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। हालांकि कुछ किसान, जो किसी तरह अपनी फसल बचाने में सफल रहे, उन्हें ऊंचे दामों का लाभ जरूर मिला, लेकिन अधिकांश किसान खराब खेती, कीट प्रकोप और मौसम की मार के चलते हताश नजर आ रहे हैं।
प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा का कहना है कि इस बार टमाटर की खेती के दौरान ओलावृष्टि जैसी कोई बड़ी आपदा नहीं आई, लेकिन सूड़ी नुमा कीड़े ने फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि लगातार एक ही फसल की खेती से जमीन की उर्वरता कम हुई है, जिससे कीट प्रकोप बढ़ा और टमाटर की फसल बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो गई।
वहीं, एक अन्य टमाटर उत्पादक किसान निरंजन सिंह मेहरा ने बताया कि कई प्रभावी कृषि दवाइयों पर प्रतिबंध लगने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कुछ किसानों ने नीम आधारित उपचार से बीमारी पर काबू पाने की कोशिश जरूर की, लेकिन अधिकांश किसान यह उपाय नहीं अपना सके। परिणामस्वरूप केवल 10 से 20 प्रतिशत किसान ही टमाटर की खेती से लाभ कमा पाए, जबकि सैकड़ों किसानों की फसल खेतों में ही नष्ट हो गई।
किसानों का कहना है कि जिस समय टमाटर की पौध लगाई गई, उस दौरान तापमान 23 डिग्री सेल्सियस से अधिक था, जिससे फसल को शुरुआती चरण में ही नुकसान पहुंचा। गौलापार क्षेत्र में शौर्य, अभिनव, अर्जुन हाइब्रिड, 1143 और सोनजाई जैसी प्रजातियों की खेती की गई थी, लेकिन ये सभी प्रजातियां सूड़ी नुमा कीड़े के आगे टिक नहीं सकीं।
स्थिति यह है कि स्थानीय बाजारों में अब भी टमाटर के दाम 50 रुपये प्रति किलो से नीचे नहीं उतर पा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को भी सस्ते टमाटर का इंतजार है। कुल मिलाकर, उत्तराखंड का प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्र हल्द्वानी का गौलापार इस बार कम पैदावार और बढ़ती कीमतों के कारण चर्चा में बना हुआ




