लालकुआं/बिंदुखत्ता।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र में जनाक्रोश अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है। बुधवार को आयोजित विशाल जनरैली ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन की यादें ताजा कर दीं। बिंदुखत्ता से लालकुआं तक उमड़ा जनसैलाब यह संकेत दे गया कि वर्षों से सुलग रही मांग अब व्यापक जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।
बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले जड़ सेक्टर स्थित जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में हजारों ग्रामीण एकत्रित हुए। सभा में बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। खास बात यह रही कि इस बार बड़ी संख्या में युवाओं ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभाई और राजस्व गांव की मांग को लेकर खुलकर अपनी आवाज बुलंद की।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता वासी चंदवंश और कत्यूरी वंश के समय से भाभर क्षेत्र में गोठ-खत्तों के माध्यम से आजीविका चलाते आए हैं तथा आज भी उनकी आजीविका वनों पर निर्भर है। देश की आजादी के दशकों बाद भी क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व गांव का दर्जा न होने के कारण क्षेत्रवासी केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं।
धरने को समर्थन देने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार ने बिंदुखत्ता को नगर पालिका घोषित किया था, लेकिन उस समय विरोध के चलते निर्णय वापस लेना पड़ा। उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही इस मांग को अब तक पूरा न किया जाना जनता की उपेक्षा है। उन्होंने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल समेत कई राजनीतिक एवं सामाजिक नेताओं ने जनसभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बिंदुखत्ता वासियों को राजस्व गांव का दर्जा मिलना उनका अधिकार है और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।
सभा के उपरांत हजारों ग्रामीणों ने लालकुआं शहर में विशाल जुलूस निकाला। शहीद स्मारक और मुख्य चौराहे से होते हुए जुलूस तहसील परिसर पहुंचा, जहां प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दो माह के भीतर बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने संबंधी शासनादेश जारी करने की मांग की गई।
प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयावधि में अधिसूचना जारी नहीं की गई तो अप्रैल माह में हल्द्वानी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर उग्र आंदोलन भी किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने का मुद्दा एक बार फिर सियासी रंग पकड़ता नजर आ रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस विषय पर राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




