उत्तराखण्ड

बड़ी खबर(देहरादून)वनाग्नि रोकथाम को लेकर पहली बार राज्यस्तरीय समन्वय बैठक. अहम निर्णय।।


सभी विभाग मिलकर करेंगे संयुक्त कार्रवाई, मॉक ड्रिल और कंट्रोल रूम की व्यवस्था
देहरादून, । उत्तराखंड में हर वर्ष बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने पहली बार राज्यस्तर पर अंतर्विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की। आईसीएफआरई (ICFRE), देहरादून में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं हॉफ (HoFF) ने की।
बैठक में PCCF श्री एस.पी. सुबुद्धि, डॉ. विवेक पांडे (APCCF), श्रीमती मीनाक्षी जोशी (APCCF) सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA), एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), वन सर्वेक्षण भारत (FSI), आईसीएफआरई, एफआरआई, यूकॉस्ट, यूरेडा, शिक्षा विभाग, रेड क्रॉस तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए।
बैठक में मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) ने राज्य में वनाग्नि की वर्तमान स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों और जोखिम मानचित्रण पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष वनाग्नि सत्र से पहले ही सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि मौसम विभाग के सहयोग से प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। FSI के उपग्रह आधारित फायर अलर्ट सिस्टम से निगरानी बढ़ाई जाएगी। आपात स्थिति में संयुक्त नियंत्रण कक्ष स्थापित कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
वनाग्नि रोकथाम के लिए अग्नि रेखाओं का रख-रखाव, नियंत्रित दहन, ज्वलनशील पदार्थों की सफाई और ग्राम स्तर पर वनाग्नि सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य विभाग और रेड क्रॉस आपात चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएंगे।
प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि उत्तराखंड की वन संपदा राज्य की अमूल्य धरोहर है, जिसकी सुरक्षा के लिए सभी विभागों का समन्वित प्रयास आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से वनाग्नि की घटनाओं को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा।
बैठक में सभी विभागों ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और वनाग्नि सत्र के दौरान नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
— संवाददाता

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