Uttarakhand city news (चंचल गोला) कोसी नदी किनारे से गायब हो रहा दुर्लभ आइबिसबिल, रिसॉर्ट्स की तेज़ आवाज़ ने बढ़ाई परेशानी
रामनगर: कोसी नदी तट पर सर्दियों में बड़ी संख्या में दिखने वाला दुर्लभ हिमालयी पक्षी आइबिसबिल अब तेजी से गायब हो रहा है। पहले सात की टोली में दिखने वाला यह पक्षी अब घटकर मात्र दो रह गया है, जिससे पर्यटकों और बर्ड लवर्स में चिंता बढ़ गई है।
दी पायनियर की खबर
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पक्षी प्रेमी दीप रजवार के अनुसार आइबिसबिल हर साल सिक्किम, लद्दाख और ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर का प्रवास कर कोसी नदी के शांत और कंकड़युक्त किनारों पर शरण लेने आता था। वर्षों से यह इलाका इसका पसंदीदा शीतकालीन आवास रहा है, लेकिन अब यह सुकून भरा वातावरण खतरे में है।
कॉर्बेट क्षेत्र के आसपास अनियंत्रित रूप से खुल रहे रिसॉर्ट्स, देर रात तक चलने वाली शादी-पार्टियां, तेज़ आवाज़ वाले साउंड सिस्टम और बढ़ती मानवीय गतिविधियों ने इन अति-संवेदनशील पक्षियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। नतीजतन, गरजीया मंदिर क्षेत्र के पास इनकी संख्या सात से घटकर पांच और अब मात्र दो रह गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञ प्रशांत कुमार बताते हैं कि आइबिसबिल बेहद शर्मीला और संवेदनशील पक्षी है, जो तेज़ आवाज़ और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से दूर भागता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो यह दुर्लभ परिंदा हमेशा के लिए इस क्षेत्र को छोड़ सकता है।
स्थानीय बर्ड लवर्स और पर्यटन व्यवसायियों ने प्रशासन से सख्त शोर-नियंत्रण उपाय लागू करने और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है, ताकि कोसी नदी तट एक बार फिर इन हिमालयी प्रवासियों के लिए सुरक्षित आश्रय बन सके।




