उत्तराखण्ड

बड़ी खबर) मानसून की आई बड़ी अपडेट,पिछले वर्ष की तुलना में इतनी होगी बरसात ।।

भारत की अग्रणी मौसम पूर्वानुमान और कृषि जोखिम समाधान कंपनी स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) 2026 के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। स्काईमेट के अनुसार इस साल मानसून ‘सामान्य से कम’ रहेगा, यानी जून से सितंबर (4 महीने) के दौरान कुल बारिश लगभग 94% होगी। जबकि इन 4 महीनों में सामान्य औसत (LPA) 868.6 मिमी होता है। हालांकि, इसमें ±5% तक का अंतर हो सकता है। जिसका मतलब है कि जो भी पूर्वानुमान दिया गया है उसके 5 प्रतिशत तक ऊपर या नीचे जाने की संभावना होती है। मानसून “सामान्य से कम” होने का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रह सकती है। गौरतलब है, स्काईमेट ने जनवरी 2026 में भी कमजोर मानसून का संकेत दिया था और अब भी कंपनी ने अपनी उसी अनुमान को दोहराया है।
स्काईमेट के एमडी जतिन सिंह के अनुसार, “डेढ़ साल तक चले ला-नीना (La Niña) के बाद अब प्रशांत महासागर की स्थिति सामान्य (ENSO-न्यूट्रल) होने के अनुकूल हो गई गई है। जिसका मतलब होता है, न अल-नीनो (El Niño) और न ला-नीना (La Niña) सक्रिय हैं, यानी समुद्र का तापमान सामान्य स्थिति में है। वहीं, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र और वातावरण के बीच तालमेल पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है। लेकिन दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत में अल-नीनो (El Niño) बनने की संभावना है, जो साल 2026 के अंत तक और मजबूत हो सकता है। अल-नीनो के आने से मानसून कमजोर पड़ सकता है, खासकर सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश का पैटर्न अनियमित और असंतुलित रहने की संभावना है।“
ENSO के अलावा, हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) भी मानसून को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। अगर Indian Ocean Dipole (IOD) मजबूत और सकारात्मक होता है, तो यह मानसून पर अल-नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है। फिलहाल IOD के सामान्य या थोड़ा अधिक रहने की उम्मीद है, जिससे मानसून की शुरुआत ठीक हो सकती है। लेकिन सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने का खतरा बना रहेगा और बारिश का वितरण असमान हो सकता है। जानकारी के लिए बता दें, Indian Ocean Dipole (IOD) एक मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण घटना है, जो हिंद महासागर के तापमान में बदलाव के कारण बनती है।
स्काइमेट के अनुसार, मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य वर्षा-आधारित (rainfed) क्षेत्रों में कम बारिश हो सकती है। अगस्त-सितंबर में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश रहने की संभावना है। वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत (जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय आदि) में बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर बारिश होने की उम्मीद है।

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एलपीए (LPA) क्या होता है?

LPA (Long Period Average) का मतलब है किसी जगह की लगभग 30 साल की औसत बारिश। यह मानसून को समझने का एक मानक होता है, जिसके आधार पर तय किया जाता है कि साल का मानसून सामान्य, अच्छा या कमजोर है।

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सौजन्य से स्काईमेट

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