उत्तराखण्ड

(बड़ी खबर)हाथी कॉरिडोर और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मामला.हाईकोर्ट नैनीताल ने दिया अहम फैसला ।।

नैनीताल । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ‘ऋषिकेश-भानियावाला रोड प्रोजेक्ट’ के निर्माण के संबंध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा दायर स्पष्टीकरण आवेदन को यह कहते हुए निपटा दिया है कि इस मामले में कोर्ट को किसी और स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पेड़ों के कटान पर रोक के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देश पहले ही समाप्त हो चुके हैं।

यह मामला रेनू पॉल द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजना के कारण पर्यावरण और विशेष रूप से ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ (हाथी गलियारे) पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का मुद्दा उठाया गया था। इससे पहले, 9 जनवरी 2026 को अदालत ने इस जनहित याचिका की कार्यवाही को बंद कर दिया था और पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित समान मामलों के फैसले का इंतजार करने की छूट दी थी।
एनएचएआई ने हाल ही में अदालत में अर्जी दाखिल कर यह स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या उन्हें राजमार्ग का निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति है।

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प्राधिकरण का तर्क था कि वन विभाग के अधिकारी उन्हें वन भूमि पर पेड़ काटने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। एनएचएआई ने कोर्ट से इस बाधा को दूर करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की पुरानी फाइलों और आदेशों का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि पेड़ों के कटान पर रोक केवल 12 मार्च 2025 को एक सुनवाई की अगली तारीख तक के लिए लगाई गई थी। इसके बाद अदालत ने उस रोक (स्टे) को कभी आगे नहीं बढ़ाया, जिसका अर्थ है कि वर्तमान में हाईकोर्ट की ओर से निर्माण पर कोई रोक प्रभावी नहीं है।

मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय ने अपने आदेश में कहा कि यदि वन विभाग एनएचएआई को पेड़ काटने की अनुमति नहीं दे रहा है, तो यह एक स्वतंत्र कानूनी मुद्दा है। इसके लिए एनएचएआई अलग से कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इस जनहित याचिका के संदर्भ में अदालत अब कोई नया स्पष्टीकरण जारी करना उचित नहीं समझती।

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अदालत ने यह भी दोहराया कि एलिफेंट कॉरिडोर और पर्यावरण से संबंधित प्रमुख मुद्दे पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं। ‘अनीता कंडवाल बनाम उत्तराखंड राज्य’ जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने बाकी हैं, इसलिए हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को बंद करते हुए स्पष्ट किया कि सभी पक्षों के विकल्प खुले हुए हैं।

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