उत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा कांड के साजिशकर्ता मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने आज भी उन्हें कोई राहत नही देते हुए अगली सुनवाई हेतु 16 अप्रैल 2026 की तिथि नियत की है। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ती आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ती आलोक महरा की खण्डपीठ में हुई। कोर्ट ने सरकार और आरोपी के अधिवक्ता से पूछा है कि इनके खिलाफ जो अन्य सात मुकदमे हैं । उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। कितने केसों में बरी हो चुके और कितने विचाराधीन है। कोर्ट को बताएं। हुई सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया कि जांच के दौरान इनके खिलाफ इन केसों के अलावा अन्य सात मुकदमे दर्ज होने की पुष्टि हुई है। कई मामलों में ये बरी हो चुके हैं। कुछ का पता अभी नही चल सका है। जिसपर कोर्ट ने सभी केसों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने को कहा है। मामले के अनुसार मलिक को राजकीय भूमि को खुर्द बुर्द करने के का आरोप होने के साथ साथ मामले में सरकारी काम में व्यवधान करने के आरोप है। मामले के अनुसार मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित ,झूठे सपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया । यही नही उनके द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया। राज्य सरकार की तरफ से उनकी जमानत प्रार्थनपत्र का विरोध करते हुए कहा कि बनभूलपुरा कांड की शुरुआत यही से हुई थी। जब प्रसाशन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने गया तो उनके ऊपर पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए कईयों की जान तक चली गयी। दंगे से सम्बन्धीत मामलों में इनकी जमानत नही हुई है। इसलिए इनकी जमानत निरस्त किया जाय। आरोपियो का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नही है। पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाय। जबकि दंगे में सामील सौ से अधिक लोगो को जमानत पहले ही कोर्ट से मिल चुकी है।




