उत्तराखण्ड

बड़ी खबर(नैनीताल )राजस्व गांव को लेकर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई ।।

उत्तराखंड हाइकोर्ट ने उधम सिंह नगर की जसपुर तहसील के तीन ग्राम शिपका, मिलख शिपका और मनोरारथपुर थर्ड को राजस्व ग्राम बनाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि अगली सुनवाई की तिथि तक राज्य सरकार कोर्ट को यह बताएं कि जो नियुक्त सिचाई विभाग के नोडल अधिकारी और वन विभाग के नोडल अधिकारी की रिपोर्ट है। उस पर शासन ने क्या निर्णय लिया है । अगर उनको इनकी रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। तो साशन स्तर पर उसपर क्या निर्णय लिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर रिपोर्ट अभी तक नोडल अधिकारी ने क्यों नही भेजी उसपर भी राज्य सरकार कारण बताएं। हुई सुनवाई के दौरण याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि नोडल अधिकारियों ने जो रिपोर्ट उनको दी है। वह सरकार को नही भेजी गई। जिसपर कोर्ट ने कहा कि सरकार को यह रिपोर्ट भेजी गई या नही । उसके बारे में कोर्ट को अवगत कराएं। अगर भेजी गई है तो उसपर सरकार ने क्या निर्णय लिया उसे सरकार कोर्ट को बताए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई हेतु रिपोर्ट आने के तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार मनोरथपुर थर्ड निवासी मुख्यतियार सिंह व पंजाब सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि शिपका, मिलख शिपका व मनोरथ पुर थर्ड गाँव की जमीन 1958 में तुमड़िया डैम बनने से साढ़े तीन सौ हैक्टेयर भूमि चली गयी थी।जिसके बाद इन गांवों को रिजर्व फारेस्ट की भूमि दे दी गयी। रिजर्व फारेस्ट की भूमि देने से अब ये गाँव राजस्व ग्राम नही रहे। जिसके चलते यहां के ग्रामीणों सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है। पूर्व में केंद्र सरकार ने इन गांवों को राजस्व ग्राम बनाने की अनुमति दी गई थी। बावजूद इसके आज तक इन्हें राजस्व ग्राम घोषित नही किया गया। और सरकार ने यह परमिशन 2017 में वापस ले ली। याचिकर्ताओ द्वारा यह भी कहा गया कि इन तीनो गावो को राजस्व ग्राम घोषित किया जाय।

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