अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है कैंपस स्कूल, पंतनगर
पंतनगर
देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर परिसर में संचालित सीबीएसई से संबद्ध कैंपस स्कूल आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी अपनी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और मजबूत प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध यह स्कूल आज गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
1970 में विश्वविद्यालय की स्थापना (1960) के बाद संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से कैंपस स्कूल स्थापित किया गया था। कुछ ही वर्षों में यह एक उत्कृष्ट शिक्षण केंद्र के रूप में उभरा। इसकी ख्याति ऐसी थी कि सिर्फ पंतनगर ही नहीं, बल्कि आसपास के कस्बों और शहरों से भी बच्चे यहां पढ़ने आते थे, जिनके लिए कई बसें चलती थीं।
लगभग 20 वर्ष पहले स्कूल विवादों में घिरना शुरू हुआ, बावजूद इसके छात्र संख्या मजबूत बनी रही। लेकिन साल 2012 के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ती गई। जहां पहले लगभग 2400 छात्र अध्ययनरत थे, वहीं वर्तमान में यह संख्या सिर्फ 700 के आसपास रह गई है।
छात्र संख्या में भारी गिरावट के कारण फीस से मिलने वाला आय-स्रोत घटता गया और स्कूल गंभीर वित्तीय संकट में पहुंच गया। हालात इतने खराब हो गए हैं कि शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित वेतन तक नहीं मिल पा रहा है।
स्कूल की गिरती प्रतिष्ठा और लगातार आर्थिक समस्याओं ने इसे ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां पुनर्जीवन की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही। एक समय का उत्कृष्ट शिक्षा संस्थान आज अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में है।
स्थानीय अभिभावकों और पूर्व छात्रों ने चिंता व्यक्त करते हुए स्कूल को बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।




