कामरेड राजा बहुगुणा का कैंसर से निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर
नैनीताल। इंडियन पीपुल्स फ्रंट के उत्तराखंड में संस्थापक अध्यक्ष, राज्य आंदोलनकारी और बिंदुखत्ता की बसासत में अहम भूमिका निभाने वाले कामरेड राजा बहुगुणा का लंबी बीमारी (कैंसर) से आज निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया।
68 वर्षीय बहुगुणा अपने पीछे पत्नी, पुत्री सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सशक्त योद्धा रहे और चिपको आंदोलन तथा महतोष मोड़ आंदोलन में भी उनकी अहम भूमिका रही। बिंदुखत्ता की बसासत के संघर्ष में वे अग्रिम पंक्ति में रहे और जनता के बीच उन्हें “कामरेड” के नाम से जाना जाता था।
कामरेड राजा बहुगुणा का वास्तविक नाम राजेश्वर बहुगुणा था। वे उत्तराखंड में भाकपा (माले) के संस्थापकों में से एक और पार्टी की केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चेयरमैन थे। अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज हमेशा बुलंद रही। उनके भाषण सुनने के लिए लोग उत्सुकता से इंतजार किया करते थे, और उन्हें वामपंथी आंदोलन का पुरोधा माना जाता है।
उनके निधन पर भाकपा (माले) कार्यालय में शोक सभा आयोजित की गई।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर भाकपा (माले) कार्यालय, बिंदुखत्ता (लालकुआं विधानसभा क्षेत्र) में लाया जाएगा। इसके बाद शनिवार को शवयात्रा चित्रशिला घाट के लिए रवाना होगी।
जन आंदोलनों के इस चर्चित और निर्भीक ऊर्जा स्रोत को श्रद्धांजलि देते हुए लोग कह रहे हैं कि “जहां अन्याय होता था, वहां कामरेड राजा बहुगुणा की दहाड़ सुनाई देती थी।”
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दें।




