उत्तराखण्ड

बड़ी खबर(देहरादून)निवास प्रमाण पत्रों की जांच का एलान स्वागतयोग्य, जरूरत अनुसार बढ़ेगा दायरा : भट्ट

निवास प्रमाण पत्रों की जांच का एलान स्वागतयोग्य, जरूरत अनुसार बढ़ेगा दायरा : भट्ट

एसआईआर विरोधी कांग्रेस का दस्तावेज जांच दायरा बढ़ाने का तर्क हास्यास्पद

देहरादून 18 नवम्बर। भाजपा ने मुख्यमंत्री द्वारा विगत वर्षों में बने निवास प्रमाण पत्रों की जांच के एलान का स्वागत किया है।
प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा कि हमारी सरकार डेमोग्राफी बदलने की साजिश रचने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई कर रही है। इस जांच से कालनेमि और उनके राजनैतिक शुभचिंतकों में अब किसी भी तरह की गलतफहमी शेष नहीं रहनी चाहिए। हालांकि एसआईआर
विरोधी कांग्रेस का दस्तावेज जांच की परिधि 3 साल से बढ़ाने का तर्क हजम नहीं होता है।

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मीडिया द्वारा धामी सरकार के इस निर्णय और उसपर विपक्षी प्रतिक्रिया पर आधारित सवालों का ज़बाब देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य की जनसांख्यिकीय संतुलन और देवभूमि की छवि से किसी भी तरह का समझौता नही किया जाएगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी का विगत 3 वर्षों में बने प्रमाणपत्रों की जांच स्वागतत योग्य है, जिसे सामने आई कुछ शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए लिया गया है। हमारी सरकार पूर्णतया प्रतिबद्ध है कि राज्य के संसाधनों, योजनाओं और व्यवस्थाओं का लाभ स्थानीय पात्र लोगों को हासिल हो। जिसके लिए यदि कोई उनके हितों पर डाका डाल रहा है या ऐसा कोई प्रयास कर रहा है, तो उसे चिन्हित कर कार्रवाई करने हेतु ही यह प्रक्रिया की जा रही है।

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उन्होंने विपक्ष द्वारा इस जांच के दायरे को बढ़ाने के सवाल पर स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता ही योजनाओं, संसाधनों के लाभ लेने वाले कालनेमी को बाहर निकलने की है, लिहाजा पूर्व की जांचों से भी कोई परहेज नहीं है। वहीं तंज कसते हुए कहा कि असल दिक्कत तो कांग्रेस को ही आएगी, जब प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समूचे देश ने देखा कि बिहार में किस तरह तुष्टिकरण नीति के चलते इस संवैधानिक प्रक्रिया का विरोध किया गया। लिहाजा जो आज विगत 15 वर्षों के दस्तावेजों की जांच की बात करते हैं, वे एसआईआर में विरोध करते नजर आयेंगे। सच यह है कि कांग्रेस पार्टी के राजनीति में खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के अलग। इतना ही नहीं, दिल्ली में सैद्धांतिक विचारों के पैमाने अलग है और देहरादून में अलग, मैदान में अलग हैं और पहाड़ में अलग, अल्पसंख्यकों के लिए अलग हैं। बहुसंख्यकों के लिए अलग, जातियों के अनुसार तो अलग अलग पैमाने हैं। प्रदेश की महान जनता कांग्रेस के ऐसे सभी रूपों से वाकिफ है और अब इनके नेताओं के झांसे मे नहीं आने वाली है।

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