देहरादून-: पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना द्वारा निर्गत दिशा निर्देशों के अनुरूप राज्य की नदी सहायक नदी गद्दारों के तल से लगी एवं इससे विभिन्न निजी लाभ भूमि के समतलीकरण, वाटर स्टोरेज ,टैंक रीसाइक्लिंग टैंक ,मत्स्य पालन, निर्माण आदि क्रियाकलापों को गैर खनन कार्य क्रियाकलाप घोषित करते हुए ऐसे गैर खनन कारी क्रियाकलापों हेतु पर्यावरणीय अनुमति की आवश्यकता ना होने के संबंध में निर्गत राज्य सरकार की अधिसूचना 28 -10- 2021 को एक खनन पट्टा धारक सत्येंद्र कुमार तोमर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल में चुनौती दिए जाने के उपरांत दिनांक 6 जनवरी को निर्धारित सुनवाई में हुए निर्णय की स्थिति से भरी होल्डर के पत्र द्वारा दी गई जानकारी के उपरांत दिनांक 6 जनवरी को सरकार की अधिसूचना दिनांक 28- 10 -20 21 के अंतर्गत दी गई सभी अनुज्ञा के उप खनिज निकासी पर रोक लगाई गई थी।

क्योंकि वह होल्डर द्वारा बताई गई स्थिति के अनुरूप माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित हो इस आधार पर पूर्व में स्वीकृत सभी अनुज्ञा तथा उक्त अनुज्ञा के संबंध क्रम में खनिज निकासी के मामलों में रोक लगाई गई थी इस बीच आज माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश 6 जनवरी की प्रति प्राप्त होने के बाद स्थिति स्पष्ट हुई कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक सरकार की अधिसूचना दिनांक 28- 10-21 से किस पर ना होकर मात्र याची करता को प्रभावित करने वाले एकमात्र मामले में प्रभावी है इसको देखते हुए उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति के बाद ऐसे सभी अल्प अवधि अनुज्ञा की उम्र खनिज निकासी पर लगाई गई रोक के आदेश को दुरस्त एवं संशोधित करते हुए शासन स्तर से प्रभावी आदेश आज निर्गत किए जा रहे हैं तथा उसमें आदेश जारी किए जा रहे हैं




