उत्तर प्रदेश

बिग ब्रेकिंग(उत्तराखंड) 5 जी के बाद. अब 6 जी की तैयारी. आईआईटी रुड़की ने की शुरुआत ।।

भारत में हाई स्पीड इंटरनेट टेक्निक को लेकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने इस पर काम करना प्रारंभ कर दिया है 5 जी के बाद अब”6जी एवं उससे आगे सिस्टम के लिए डिमिस्टिफाइंग सेल-फ्री कम्युनिकेशन उच्च स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर इसकी शुरुआत की है।
रुड़की
ईसीई विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) एसईआरबी की त्वरित विज्ञान योजना के तहत “6जी और उससे आगे सिस्टम के लिए डिमिस्टिफाइंग सेल-फ्री कम्युनिकेशन पर सात दिवसीय उच्च स्तरीय कार्यशाला का आयोजन चल रहा है. कार्यशाला का केंद्र पारंपरिक मल्टीसेल सिस्टम के संभावित विकल्प के रूप में 6जी और उससे आगे के सिस्टम के लिए विचार किया गया।
कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी, पूर्व निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की व प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर द्वारा प्रोफेसर रजत अग्रवाल, एसोसिएट डीन इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, प्रोफेसर संजीव मन्हास, कार्यवाहक प्रमुख, ईसीई, प्रो अभय के साह, कार्यक्रम आयोजक एवं सहायक प्रोफेसर उपस्थिति थे। इस कार्यशाला में कुल 12 विशेषज्ञ (विदेश से 2, अन्य आईआईटी/आईआईएससी/सीएफआई से 5, आईआईटीआर से 4 और उद्योग से 1) और 45+ प्रतिभागी भाग ले रहे है। इन 45 प्रतिभागियों में से 30 एसईआरबी द्वारा प्रायोजित हैं, 10 स्व-प्रायोजित हैं या अन्य परियोजनाओं द्वारा समर्थित हैं, कार्यशाला में अन्य प्रमुख वक्ताओं में प्रोफेसर ए चोकलिंगम, आईआईएससी बैंगलोर; प्रोफेसर हेन एनगो, क्वींस यूनिवर्सिटी, बेलफास्ट; प्रो लुका सांगुइनेटी, पीसा विश्वविद्यालय, इटली; प्रोफेसर संदीप कुमार, आईआईटी दिल्ली; डॉ. सत्य के वंकयाला, सैमसंग, आर एंड डी संस्थान; प्रोफेसर आदर्श पटेल, आईआईटी मंडी; प्रो मोहम्मद शरीक, एएमयू अलीगढ़; प्रो मीनाक्षी रावत, आईआईटी रुड़की; प्रोफेसर एकांत शर्मा, आईआईटी रुड़की; प्रोफेसरअंशुल जायसवाल, थे।
कार्यशाला या वर्कशॉप का उद्देश्य सेल-फ्री कम्युनिकेशन के बिल्डिंग ब्लॉक्स को खोलना है और सेल-फ्री कम्युनिकेशन पर सेल्युलर कम्युनिकेशन के मूल सिद्धांतों से लेकर उद्योग/मानक परिप्रेक्ष्य तक के विषयों को कवर करना है। इसमें सेल-फ्री सिस्टम का मॉडलिंग, कुछ प्रासंगिक सिग्नल प्रोसेसिंग चुनौतियां, आईआरएस, वीएलसी आदि के साथ सह-अस्तित्व के मुद्दे और एआई/एमएल की भूमिका भी शामिल होगी। इनके अलावा, प्रतिभागी, प्रदर्शन का अनुकूलन और मूल्यांकन करने के लिए प्रोटोटाइप एल्गोरिदम को लागू करने में भी लगे रहेंगे।

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