उत्तराखण्ड

ब्रेकिंग-:सड़कों का मलवा नदियों,खेतों एवं जंगलों के किनारे डालने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 4 सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने को कहा।।

नैनीताल।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में किये जा रहे सड़को का निर्माण के दौरान उनका मलुआ जंगलो, सड़क के किनारों, खेतों व नदियों में डाले जाने के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने सेकेट्री पीडब्ल्यूडी, सेकेट्री फारेस्ट, मुख्य वन संरक्षक, रूरल रोड एजेंसी उत्तराखंड, पीएमजीएसवाई, सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार, बीआरओ, केंद्र व स्टेट पॉल्यूशन क्रंटोल बोर्ड तथा नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार सप्ताह बाद की तिथि नियत है। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी अमित खोलिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य के  पर्वतीय क्षेत्रों सहित मैदानी क्षेत्रों में सड़को निर्माण का किया जा रहा है जो निर्माण किया जा रहा है। वह तय समय के भीतर पूरा नही हो रहा है। सड़क  निर्माण के दौरान मलुवा नदियों, नालों, जंगलों और आसपास के क्षेत्रों व गावो के खेतों में डाला जा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ ही नदियों में मलुवा जमा होने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते है। कुछ दिन पहले वर्षात होने के कारण कई गांवां में इन सड़कों का मलुआ घुस गया, नाले बन्द हो गए व काश्तकारों के खेत बह गए। सड़क निर्माण कर रही एजेंसी व प्रशासनिक अधिकारी पैंसा बचाने के लिए मलुवे को निस्तारित जगह पर नही डालती है।

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