उत्तराखण्ड

ब्रेकिंग-:बेसिक शिक्षकों की माध्यमिक में समायोजन हेतु जारी विज्ञप्ति में नाॅन बीएड शामिल नहीं किए जाने पर उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संगठन खफा,न्यायालय में जाने का बना रहा है मन ।।

हल्द्वानी

बेसिक शिक्षकों की माध्यमिक में समायोजन हेतु जारी विज्ञप्ति में नाॅन बीएड शामिल नहीं किए जाने को बेसिक शिक्षकों के साथ अन्याय
बताते हुए उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से इस खामी को दूर किए जाने की मांग की है उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संगठन के जिला मंत्री डिगर सिंह पडियार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि
अगस्त 2019 में बेसिक से एलटी समायोजन हेतु अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल नैनीताल द्वारा जो विज्ञप्ति जारी की गई थी उसमें बीएड की अनिवार्यता का जिक्र नहीं था और न ही इससे पूर्व कोई ऐसी अनिवार्यता/बाध्यता थी।
इसी विज्ञप्ति के आधार पर बहुत से प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूल में कार्यरत शिक्षकों ने आवेदन किया था, दिसम्बर 2019 में एक अन्य शासनादेश/एलटी संशोधित नियमावली जारी हुई जिसमें बीएड अनिवार्य किया गया अक्टूबर, 2020 में नयी विज्ञप्ति पुनः जारी की गई, जिसमें पूर्व में किए गए आवेदकों को फिर से आवेदन नहीं करने के लिए कहा गया। पूर्व आवेदन ही स्वीकार कर लिए जाएंगे।
अब वर्तमान में जो वरिष्ठता सूची अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल नैनीताल द्वारा बेसिक शिक्षकों की माध्यमिक में समायोजन हेतु जारी की गई हैं उनमें नाॅन बीएड शामिल नहीं किए गए हैं। यह एक बहुत बड़ा पक्षपातपूर्ण और अवसर से वंचित करने वाला निर्णय है।
बी0एड0 शिक्षक दोहरा लाभ प्राप्त कर रहे हैं एक तरफ बेसिक में नियुक्ति देने से बी0टी0सी0 टीचर्स का हक छिन रहा है दूसरी तरफ समायोजन की प्रकिया में भी नॉन बी0एड0 को वंचित किया जा रहा है।
चूंकि विज्ञप्ति जारी करते समय बीएड अनिवार्यता उल्लेखित नहीं थी संगठन माँग करता है कि समायोजन में नाॅन बीएड को भी पूर्व की भाँति इस बार भी शामिल किया जाए| अन्यथा उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन/ शिक्षको को माननीय न्यायालय की शरण में जाने हेतु बाध्य होना पड़ेगा जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व विभाग का होगा |
साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को एक ही पद पर कार्य करते हुए 30 वर्षों से भी अधिक का समय हो गया है अभी तक उनकी एक भी पदोन्नति का अवसर प्रदान नहीं किया गया है जो कि शिक्षकों के साथ अन्याय है|

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