नैनीताल।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पंत नगर में नेशनल हाइवे, नंगला और पंतनगर यूनिवर्सिटी की जमीन पर अतिक्रमण करने के खिलाफ दायर जनहित पर सुनवाई की। जिला अधिकारी उधम सिंह नगर ने पूर्व के आदेश के क्रम में शपथपत्र पेश किया जिसमें उन्होंने कहा कि उनको अतिक्रमण हटाने हेतु एक माह का समय दिया जाय क्योंकि अभी कोरोना चल रहा है उनके पास स्टाफ की कमी है। उन्होंने अपने शपथपत्र में फारेस्ट की भूमि पर भी अतिक्रमण होने के बात भी कही है। जिस पर कोर्ट ने याचिकर्ता के अधिवक्ता से वन विभाग को पक्षकार बनाने को कहा है साथ मे कोर्ट ने जिलाधिकारी व एक्जयुक्यूटिव इंजीनियर नेशनल हाइवे को चार अगस्त को कोर्ट में पेश होने को भी कहा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि इन जगहों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है पन्त नगर विश्वविद्यालय की भूमि पर 193 अतिक्रमण नेशनल हाइवे पर 490 अतिक्रमण और फारेस्ट की भूमि पर भी हुआ है जो अभी चिन्हित नही किया गया है। मामले के अनुसार पंतनगर निवासी अजय कुमार ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि जिला उधमसिंह नगर के पंतनगर, नगला, नेशनल हाइवे और पंतनगर यूनिवर्सिटी की सरकारी भूमि पर पिछले कई सालों से अतिक्रमण कर अवैध रूप से निर्माण कर लिया है। जिससे नेशनल हाइवे की सड़क संकरी हो गई है और सड़क दुर्घटनाओं की सम्भावना बनी हुई है और पिछले कुछ सालों में सार्वजनिक सम्पत्ति पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो गया है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है नेशनल हाइवे और पंतनगर यूनिवर्सिटी की भूमि में अतिक्रमण कारियो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए और उन्हें हटाया जाये।




