उत्तरकाशी
उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाले निवासियों को किस तरह से अपने जीवन को संघर्ष के रूप में जीना पड़ता है वह लोगों को नजदीक से देखने से ही समझा जा सकता है आपदा क्षेत्र में तमाम चुनौतियों के बीच संघर्षरत यहां के निवासियों का मनोबल ही है कि इतने बड़े हादसे होने के बावजूद भी वह अपने अपने घरों में बुलंद चट्टान की तरह डटे रहते हैं। मांडों व कंकराड़ी आदि क्षेत्रों में अतिवृष्टि के कारण प्रभावित ग्रामीण आज तिनके तिनके को जोड़कर बनाए हुए आशियाने को फिर से सवारने लगे हैं। दो महिलाओं एवं एक बच्चेे की मौत के बावजूद ग्रामीण फिर आकाश से आ रही आफत की बरसात सेेेे डरे एवं सहमे हुए लेकिन इसके बाद भी किसी भी ग्रामीण के मनोबल में कोई कमी नहीं है।

हालांकि तमाम चुनौतियों के बीच जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं की आपूर्ति लगातार की जा रही है। प्रभावित ग्रामीणों एवं राहत व खोज बचाव में लगे दल को खाने पीने की वस्तुओं बिस्किट,पीने का पानी,बच्चों के लिए दूध व भोजन आदि की व्यवस्था कर रहे है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि आपदा प्रभावित गांव के लिए नोडल अधिकारी नामित किये गए है। जो समस्त कार्यों का पर्यवेक्षण करेंगे। आपदा से प्रभावित ग्रामीणों का चिन्हीकरण कर 24 घण्टे के भीतर मुआवजा धनराशि वितरण करने के साथ ही निजी क्षतियों का विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश एसडीएम को दे दिए गए है। लोक निर्माण,बीआरओ व पीएमजीएसवाई को सड़क मार्ग तेजी के साथ खोलने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी लम्बगांव श्रीनगर मोटर मार्ग स्थान साड़ा गांव के पास पुल बहने के कारण मार्ग बंद है। क्षेत्र के आवागमन को देखते हुए उक्त स्थान पर तत्काल बैली ब्रिज लगाने के निर्देश ईई लोनिवि को दिए गए है। अधिशासी अभियंता लोनिवि द्वारा अवगत कराया गया कि कल से बेली ब्रिज का कार्य प्रारंभ कर शीघ्र ही पुल तैयार कर लिया जाएगा।




