देहरादून।
वैश्विक महामारी नवल कोरोनावायरस कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर और उसमें बच्चों के संक्रमित होने की आशंकाओं को देखते हुए विशेष निर्देश जारी किए हैं।इसके तहत चिकित्सालयों में बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के अलावा उनके उपचार के व्यापक प्रबंध करने के लिए महानिदेशक स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया है। कहा गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण जल्दी से जल्दी पूरा किया जाए।

मुख्य सचिव ओम प्रकाश के हस्ताक्षरों से युक्त इस आदेश में कहा गया है कि हर जिले के सरकारी चिकित्सालयों में पर्याप्त संख्या में आक्सीजन बेड आईसीयू व वेंटीलेटरों का इंतजाम किया जाए। यदि किन्ही कारणों से यह संभव नहीं हो पा रहा है तो नजदीकी मेडिकल कालेज से यह व्यवस्था बनाई जाए। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 1 लेबल का कोविड केयर सेंटर बनाया जाए। हर 1 लेबल के कोविड केयर सेंटर में दस बेडों की व्यवस्था होनी चाहिए।


समस्त बाल रोग चिकित्सकों एवं बाल रोग विभाग में कार्यरत स्टाफ नर्सों के रिक्त पदों को पूर्ण रूप से बलिया जाए एवं भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत उपलब्ध मानक अनुसार तत्काल भर्तियां संविदा आउट सोर्स एवं प्राइवेट सेक्टर से बाल रोग विशेषज्ञ की मदद ली जाए। इसके अलावा मानव संसाधन की क्षमता को बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्रों के बाल रोग विशेषज्ञ जिनके पास रोगी को भर्ती करने की सुविधा है उनका सहयोग भी लिया जाए सिर्फ ओपीडी में रोगी देखे जा रहे हैं उनका सहयोग राजकीय चिकित्सा संस्थानों में लिया जाए । इसके अलावा कोविड-19 जांच में बच्चों की जांच प्रतिशत को बढ़ाया जाना भी सुनिश्चित किया जाए राज के अंतर्गत समस्त कार्यरत निजी चिकित्सालय एवं बाल रोग विशेषज्ञ जहां कार्यरत हैं वहां 0 से 18 आयु वर्ग के बच्चों को उपचार प्रदान किया जा रहा है उन चिकित्सालय में जीरो से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कोविड-19 की निगरानी सर्विलांस किए जाने हेतु रैपिड एंटीजन टेस्ट जांच किए जाने हेतु अधिकृत किया जाए।


एस ओ पी में हर जिले में किसी अन्य बीमारी से पीढ़ित 0 से 18 आयु वर्ग के बच्चों की सूची अभ्ीा से तैयार कर ली जाए ताकि कोरोना की तीसरी लहर के समय उनकी निगरानी भी की जा सके। एसओपी में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार से प्राप्त हो रहे आक्सीजन सिलेंडरों के अलावा यदि जिलों में और भी सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती है तो उन्हें अभी से क्रय कर लिया जाए। हर डीसीएच और मेडिकल कालेज में आक्सीजन स्टोरेज टैंक की व्यवस्था की जाए जिनकी क्षमता कम से कम एक हजार लीटर प्रति मिनट होनी चाहिए।




