लखनऊ।
कोरोना महामारी के दौर में भी कुछ लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। लखनऊ के रईसजादे अपनी अय्याशी के लिए थाईलैंड से कॉल गर्ल बुला रहे हैं। सात लाख रुपया खर्च करके व्यापारी के पुत्र ने करीब 10 दिन पहले कॉल गर्ल को थाइलैंड से लखनऊ बुलवाया था। उसके लखनऊ आने के तीन दिन बाद ही उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उसको डॉ राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, गोमतीनगर में भर्ती करवाया गया।
लेकिन इलाज के दौरान जब कॉल गर्ल की तीन मई को मौत हो गई, तो व्यापारी पुत्र ने खुद ही थाइलैंड एंबेसी सम्पर्क भी किया। मामला दो देशों के बीच होने के कारण खुल गया। इस प्रकरण की जब पुलिस ने जांच की तो एक के बाद एक कई खुलासे हुए हैं।
आपको बता दें कि पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस कॉल गर्ल को अभी 10 दिन पहले ही लखनऊ के एक प्रमुख व्यापारी के बेटे ने सात लाख रुपए खर्च करके थाईलैंड से बुलाया था। दो दिन बाद ही वह बीमार पड़ गई तो उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीन मई को उसकी मौत हो गई। पुलिस की जांच में सामने आया है कि व्यापारी के बेटे ने कॉल गर्ल की तबियत बिगड़ने पर खुद थाईलैंड एंबेसी को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद एंबेसी ने भारत के विदेश मंत्रालय की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया था।
इसके बाद कॉल गर्ल के शव को सौंपे जाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती गई। पुलिस ने पहले थाईलैंड एंबेसी में संपर्क करके उसके परिवार के लोगों को शव हैंडओवर करने की कोशिश की, लेकिन जब नहीं हो पाया तो शनिवार को एजेंट सलमान की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इसी एजेंट के सहारे वह भारत आई थी। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस जंग जीतने के लिए जहां लोग ऑक्सीजन के एक सिलेंडर के लिए तरस रहे हैं, वहीं
लखनऊ के इस व्यापारी पुत्र ने पूरे सात लाख रुपए खर्च करके थाइलैंड से दस दिन पहले कॉल गर्ल को लखनऊ बुलवाया था। कॉल गर्ल की मौत के बाद जब मामला खुला तो जिम्मेदारी के पैरों तले जमीन खिसक गई। इस खुलासे से अब लखनऊ का नाम की इंटरनेशनल कॉल गर्ल रैकेट में आ गया है। कॉल गर्ल की मौत के बाद पुलिस अब राजधानी में पांवपसार रहे इंटरनेशनल कॉल गर्ल रेकेट के बारे में पता करने में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि ये भी ट्रेस किया जा रहा है कि कॉल गर्ल के संपर्क में और कौन कौन आया है। पुलिस के अनुसार यह कॉल गर्ल राजस्थान के रहने वाले एक ट्रैवेल एजेंट के संपर्क में थी। उसी ने इसे लखनऊ भेजा था। पुलिस अब इस एजेंट को भी तलाश कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छानबीन में पता चला कि युवती के पास वीजा है, जो 19 मार्च 2021 से नौ जून 2021 तक के लिए मान्य है। युवती मार्च में थाईलैंड से भारत आई थी। वहीं लोहिया अस्पताल के रजिस्टर में युवती ने हजरतगंज का पता दर्ज कराया था। जांच में पचा चला कि व्यापारी ने युवती को हजरतगंज के एक होटल में ठहराया गया था। इस बीच युवती कोरोना संक्रमित हुई तो व्यापारी पुत्र ने हाथ खड़े कर लिए। हालांकि इस बारे में जब इंस्पेक्टर हजरतगंज श्यामबाबू शुक्ला से पूछा गया तो उन्होंने कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया। जबकि नियम के तहत कोई भी विदेशी अगर किसी होटल में ठहरता है तो इसकी जानकारी होटल प्रशासन को संबंधित थाने में देनी होती है। लेकिन, इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। युवती कहां ठहरी है, इसका पूरा ब्योरा भी अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज नहीं कराया गया, इससे भी इस मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस महकमा भी शुरू से सफेदपोश के बेटे की करतूतों पर पर्दा डालने में जुटा रहा और इस कालगर्ल को किसने और क्यों लखनऊ बुला पुलिस इसे भी बताने को तैयार नहीं है। हालांकि नामचीन व्यापारी के बेटे की अय्याशी काफी दबाने के बाद भी चर्चा में आ गई।




