उत्तराखण्ड

खबर मतलब की-: अब पैरा लीगल वॉलिंटियर्स भी देंगे अपनी अस्पतालों में सेवाएं,माननीय उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उच्च न्यायालय परिसर नैनीताल ने दिए निर्देश, कोरोना के पीड़ित मरीजों एवं परिजनों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित ।।

हल्द्वानी

माननीय उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उच्च न्यायालय परिसर नैनीताल के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल द्वार कोविड के मरीजों व उनके परिजनों को सहायता करने के लिए हैल्प डेस्क स्थापित किया गया है। जानकरी देते हुए इमरान मौ0 खान सिविल जज (सी0डि0)/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया है कि हैल्प डेस्क डाॅ0 सुशीला तिवारी अस्पताल तथा बीडी पाण्डे चिकित्सालय नैनीताल में स्थापित किये गये है जिसमे प्रातः 08ः00 बजे से रात्रि 08ः00 बजे तक पीएलवी अपनी सेवाएं देगे। ये सेवाएं सम्बन्धित चिकित्सालयों में 30 अप्रैल तक उपलब्ध होगी।श्री खान ने बताया कि बीडी पाण्डे चिकित्सालय में पीएलवी श्रीमती आशा (96904-10692) प्रातः 08ः00 बजे से दोपहर 02ः00 बजे तक तथा मोहित कुमार (73020-02879) दोपहर 02ः00 बजे से रात्रि 08ः00 बजे तक उपलब्ध रहेगे। उन्होने बताया कि डाॅ.सुशीला तिवारी चिकित्सालय हल्द्वानी में सुश्री किरन पंत (89419-21532) प्रातः 08ः00 बजे से दोपहर 02ः00 बजे तक तथा श्रीमती चन्द्रकला जोशी (63976-27899) दोपहर 02ः00 बजे से रात्रि 08ः00 बजे तक 25 अप्रैल तक डयूटी मे रहेगे। जब कि मोहम्द नवी (89588-54232) प्रातः 08ः00 बजे से दोपहर 02ः00 बजे तक तथा अनिल भण्डारी (63952-79035) दोपहर 02ः00 बजे से रात्रि 08 तक 26 अप्रैल से 30 अप्रैल तक डयूटी पर रहेगे। उन्होने कहा कि कोविड के मरीजों तथा उनके परिजनों से सम्बन्धित पीएलवी से सम्पर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते है।

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क्या है पीएलवी इसके बारे में भी जानिए

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का शुरुआत से ही लक्ष्य रहा है कि “न्याय” को आपके दरवाज़े तक बिना रोक-टोक के पहुँचाया जाये। इसी बात को ध्यान में रखतेहुये वर्ष 2009 से प्राधिकरण द्वारा पैरा-लीगल वालंटियर नाम की एक स्कीम शुरू की गयी। जिसके अंतर्गत समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों का चयन करके उन्हें न्यायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इन्हीं चयनित एवं प्रशिक्षित लोगों को हम आम भाषा में “पैरा-लीगल वालंटियर”(PLV) बोलते हैं। “पैरा-लीगल वालंटियर” का मतलब यह है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे क़ानून का बुनियादी ज्ञान तो है लेकिन वह पूर्ण रूप से वक़ील नहीं है। इनका मुख्य काम समाज और न्याय संस्थाओंके बीच की दुरी को कम करना है

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