उत्तराखण्ड

कवि सम्मेलन–:: हनुमान जन्मोत्सव पर हुआ कवि सम्मेलन,(अब पीओके की बारी है)

घाटी निपट गई है प्यारे, अब पीओके की बारी है

हनुमान जन्मोत्सव पर श्री राम जानकी ठाकुर द्वारा मंदिर में हुआ विशाल कवि सम्मेलन संपन्न

पलिया कलां लखीमपुर खीरी।

श्री राम जानकी ठाकुर द्वारा मंदिर निहाली पुरवा में आयोजित तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव के अंतिम दिन कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें देश प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आए हुए कवियों ने देर रात तक उपस्थित श्रोताओं के मन को खूब झकझोर कर कुरेदा और सोचने को विवश कर दिया।
भाजपा शारदा मंडल अध्यक्ष शशि शंकर शुक्ला, नगर महामंत्री विजय गुप्ता एवं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ब्लॉक अध्यक्ष कौशल किशोर प्रजापति व मन्दिर के महंत बाबा गुरुमुख दास ने संयुक्त रूप से सरस्वती माता के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया ।
पश्चात मैगलगंज से पधारे कवि अरविंद कुमार ने सरस्वती वंदना कर निम्न पंक्तियां पढीं

बुढ़ापे की कमाई को जवानी ने उड़ाया है,
बुजुर्गों ने सदा सिमटा हुआ कपड़ा उठाया है ।
कभी मां-बाप की लिखी तकदीर पढ़ लेना ,
फलों ने आजकल शाखों पर कितना जुल्म ढाया है।
इसके बाद जेबी गंज से पधारे प्रमुख गीतकार सुनील बाजपेई ने कई भावपूर्ण गीत पढ़ मंच का माहौल बनाया । उनका एक गीत कुछ इस प्रकार था
लांछन आखिर कब तक सहती, रानी बनवासिन बन रहती ।
राघव पर राजा भारी था, अपना दुखड़ा किससे कहती। खो दे प्रमाण ,धरती माता के संग सिधार गई सीता।
इस जग से हार गई सीता ।
प्नदेश की राजधानी से पधारे युवा कवि पीयूष अग्निहोत्री ने अपनी बात कुछ इस अंदाज में कही
सामने आके यह अधिकार लिया जाता है ,
दोष अपना हो तो स्वीकार लिया जाता है ।
कृष्ण, ऐसा तो नहीं भूल गए हो तुम भी ,
जुल्म बढ़ता है तो अवतार लिया जाता है ।
बरबर से पधारे हास्य कवि पवन पाल ने
सानुप्रासिक शैली में अपने दोहे कुछ इस प्रकार कहे चमके चम चम चांदनी, चंदा चंद चकोर ।
चांदी चम्मच के चुरा ,चौंके चारों चोर।।
इसके बाद हरदोई से पधारे प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्रीकांत सिंह ने श्रोताओं के आग्रह पर अपनी कई नई पुरानी दमदार रचनाएं पढ़ लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। उनकी एक रचना कुछ इस प्रकार थी
जीने वाले लोग डरा नहीं करते हैं।
जीने वाले लोग जरा नहीं करते हैं ।
बात सौ टके की यह भी है न्यारी ,
जीने वाले लोग मरा नहीं करते हैं ।

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दिल्ली के प्रमुख कवि अरविंद पथिक ने जब कश्मीर के पुराने और नए हालात, चीन और पाकिस्तान की करतूत और शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की देशभक्ति पर कविताएं पढ़ीं तो श्रोता भारत माता की जय व जय श्री राम बोलने लगे। उनकी एक रचना कुछ इस प्रकार थी
गोली का जवाब गोली से देने की तैयारी है ।
घाटी निपट गई है प्यारे, अब पीओके की बारी है ।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे नगर के प्रमुख कवि व पत्रकार रामचंद्र शुक्ल ने कार्यक्रम आयोजकों को धन्यवाद दे, आमंत्रित कवियों , अतिथियों व श्रोताओं का आभार जता यह रचना पढ़ी
जीवन संघर्षों का नाम
जीवन सबसे कठिन उन्हीं का, रात दिवस जो मेहनत करते।
खेत और खलिहान आज तक जिनकी हैं यश गाथा कहते।
सबका उदर भरें जो खुद रह ,भूखे प्यासे उन्हें प्रणाम।
अंत में मंदिर के महंत बाबा गुरमुख दास व सेवादार दौलत राम शर्मा,निरंकार प्रसाद बरनवाल, वरिष्ठ पत्रकार विश्वकांत त्रिपाठी, उमाशंकर मिश्र, दाताराम, रामसागर गांधी,यशपाल सिहं रिकार्डो, राम आसरे, सुरेश कुमार ,रामनिवास आदि ने आए हुए अतिथियों व कवियों को दुशाला उढा सम्मान पत्र दिये।

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