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उत्तराखण्ड

बिग ब्रेकिंग-: पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जत नगर मंडल के इन स्टेशनों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्टेट पाॅलुशन कन्ट्रोल बोर्ड से यह मिली अनुमति, काठगोदाम,लालकुआं, काशीपुर,रुद्रपुर,हल्द्वानी रेलवे स्टेशन हुए शामिल,कन्सेन्ट टू आपरेट अण्डर एयर एण्ड वाटर एक्ट‘ के तहत यह होंगे कार्य ।।

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गोरखपुर
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहते हुये इस दिशा में अनेक प्रभावी कदम उठाये हैं तथा यह क्रम सतत् प्रक्रिया के रूप में जारी है। पर्यावरण संरक्षण हेतु बृहद वृक्षारोपण, रेल परिसर, स्टेशनों, प्लेटफार्मों तथा ट्रेनों की उच्च स्तरीय साफ-सफाई, कोचों में ग्रीन टायलेट (बायो-टायलेट) का प्रावधान, पानी का किफायती इस्तेमाल एवं वर्षा के जल के संरक्षण हेतु रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रावधान आदि सम्मिलित है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे के चिन्हित 29 स्टेशनों को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के अन्तर्गत ‘कन्सेन्ट टू आपरेट अण्डर एयर एण्ड वाटर एक्ट‘ के तहत स्टेट पाॅलुशन कन्ट्रोल बोर्ड से अनुमति प्राप्त हुई है।
देश में पर्यावरण संरक्षण को समृद्ध करने तथा प्रदूषण को रोकने के उपायों को लागू करने की उच्चतम संस्था राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के अधीन कार्यरत स्टेट पालुशन कन्ट्रोल बोर्ड द्वारा ‘कन्सेन्ट टू आपरेट अण्डर एयर एण्ड वाटर एक्ट‘ के तहत पूर्वोत्तर रेलवे पर जिन 29 स्टेशनों को यह अनुमति प्राप्त हुई है उनमें वाराणसी मण्डल के 12 स्टेशन बनारस, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर सिटी, बेल्थरा रोड, खोरासन रोड, देवरिया सदर, छपरा, मऊ, वाराणसी सिटी, सीवान तथा भटनी, लखनऊ मण्डल के 07 स्टेशन लखनऊ जं0, गोरखपुर, गोण्डा, बस्ती, खलीलाबाद, मनकापुर एवं बादशाहनगर तथा इज्जतनगर मण्डल के 10 स्टेशन रूद्रपुर सिटी, काठगोदाम, बरेली सिटी, फर्रूखाबाद, हल्द्धानी, कन्नौज, कासगंज, काशीपुर, लालकुंआ एवं पीलीभीत सम्मिलित है।
पूर्वोत्तर रेलवे पर पर्यावरण संरक्षण हेतु बृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रतिवर्ष भारी संख्या में पौधे लगाये जाते हैं। वर्ष 2020 में निर्धारित लक्ष्य 8.5 लाख से अधिक कुल 9 लाख पौधे लगाये गये तथा वर्ष 2021 में माह जुलाई,2021 तक 6.27 लाख पौधे लगाये जा चुके हैं। गाड़ियों के कोचों में इको फ्रेण्डली ग्रीन ट्वायलेट (बायो ट्वायलेट) की व्यवस्था की गई है। अभी तक 3224 कोचों में 11611 बायो-ट्वायलेट लगाये जा चुके हैं। इस रेलवे पर डबल डेकर कोचों में भी बायो-ट्वायलेट लगाये जाने का कार्य चल रहा है। अभी तक 6 कोचों में यह सुविधा उपलब्ध करा दी गई है तथा शेष 8 कोचों में बायो ट्वायलेट लगाने का कार्य इस महीने के अन्त तक पूरा हो जायेगा । इसी प्रकार लगभग सभी हाईब्रिड कोचों में भी बायो-ट्वायलेट का प्रावधान किया जा चुका है। हमसफर एक्सप्रेस के यानों में उच्च तकनीक के बायो वैक्यूम ट्वायलेट लगाये गये हैं तथा यात्रियों से इस सुविधा के सम्बन्ध में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। पूर्वोत्तर रेलवे पर पानी का उपयोग सजगतापूर्वक किये जाने के फलस्वरूप इसकी खपत में कमी आई है। वित्त वर्ष 2021-22 के प्रथम तिमाही में यांत्रिक कारखाना,इज्जतनगर में 1 लाख लीटर पानी की बचत की गई, जिसका मूल्य लगभग रू0 25 हजार है। यह उपलब्धि उचित अनुरक्षण एवं लीकेज में कमी के द्वारा सम्भव हुई है। बारिश के पानी के संरक्षण के लिये इस रेलवे के अनेक स्थलों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाये गये हैं, जिससे वर्षा के जल का उपयोग किया जाना सम्भव हो रहा है तथा भूमि के जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। यह प्रयास जल संरक्षण की दिषा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। रेल परिसर, स्टेषनों, प्लेटफार्मों एवं गाड़ियों की उच्चस्तरीय साफ-सफाई के साथ ही रेल पटरी की साफ-सफाई पर भी विषेष ध्यान दिया जा रहा है तथा उससे सटी जमीन पर पेड़-पौधे लगाये जा रहे हैं।

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